RTI से जानकारी के साथ मिला पीने का पानी, आयोग की फटकार के बाद 72 साल से अटका काम अधिकारियों ने आधी रात में किया.Tubewell set up in Rewa Navaria Dalit colony after 72 years on rti complaint mpmr nodark | rewa – News in Hindi

RTI से जानकारी के साथ मिला पीने का पानी, आयोग की फटकार के बाद 72 साल से अटका काम अधिकारियों ने आधी रात में किया.Tubewell set up in Rewa Navaria Dalit colony after 72 years on rti complaint mpmr nodark | rewa – News in Hindi


रीवा के नेवरिया दलित बस्ती में 72 साल बाद लगा नलकूप.

मामला रीवा के नेवरिया दलित बस्ती का है और यहां आजादी के 72 साल बाद भी पानी के लिए लोग दर-दर ठोकरे खा रहे थे लेकिन 10 रुपये की आरटीआई ( RTI) के बाद नोटिस मिलने की वजह से अधिकारियों ने आधी रात में नलकूप (Tubewell) लगा दिया.

भोपाल. आरटीआई (Right to Information) से सिर्फ जानकारी मिलती है, लेकिन राज्य सूचना आयोग ने जानकारी के साथ 72 साल से ग्रामीणों को नहीं मिल रहा पीने का पानी भी मुहैया करा दिया. मजेदार बात ये है कि जो काम इतने सालों से नहीं हुआ, वह काम नोटिस देने के बाद अधिकारियों ने आधी रात में कर दिया. उन्होंने आनन-फानन में गांव में नलकूप (Tubewell)लगा दिया. ग्रामीणों को पीने का पानी मिल रहा है. यकीनन अब उन्हें पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर का सफर तय नहीं करना पड़ेगा. इस पूरे मामले का निराकरण राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान किया. आरटीआई से जानकारी के साथ जरूरतमंदों की मदद भी की जा रही है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश में आरटीआई लगाने से पीने का पानी मिल गया और ये सब इसलिए संभव हो पाया क्योंकि कोरोना काल में राज्य सूचना आयोग अपीलों का निपटारा आधुनिक और नए अंदाज में कर रहा है.

72 साल से नहीं मिला था पीने का पानी
यह मामला रीवा के नेवरिया दलित बस्ती का है और यहां आजादी के 72 साल बाद भी पानी के लिए लोग दर-दर ठोकरे खा रहे थे. उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय कर पानी नसीब हो रहा था, लेकिन जब राज्य सूचना आयोग की फटकार लगी और जिम्मेदारों के पास नोटिस पहुंचा, तो आधी रात में पीएचई के अधिकारियों ने नलकूप लगाने का कार्य किया और ये सब हो पाया महज 10 रुपए की आरटीआई की वजह से हुआ.

ये है पूरा मामलारीवा के अपीलकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने जानकारी मांगी थी कि नलकूप लगाने की योजना में अब तक क्या कार्यवाही की गई है. अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया. मामला सुनवाई के लिए सूचना आयोग में पहुंचा. राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पीने के पानी को जीवन जीने का संवैधनिक अधिकार मानते हुए इस मामले में तत्काल पीएचई के कार्यपालन यंत्री शरद सिंह और एएल चौधरी को सुनवाई का नोटिस जारी किया. नोटिस मिलते ही रीवा के पीएचई विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारियों ने आनन-फानन उस काम को किया, जो पिछले 72 सालों से नहीं हो सका था.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई
कोरोना आपदा में सूचना आयोग के नये तरीके से हो रही सुनवाई से अपीलकर्ताओं और राज्य शासन का भी फायदा हो रहा है. कोरोना को देखते हुए राज्य सूचना आयोग में अब आगे सभी सुनवाइयां व्हाट्सएप वीडिया काल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होंगी.

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First published: June 4, 2020, 3:47 PM IST





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