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Agriculture News: किसान तीन कूड़ चना, एक कूड़ सरसों और खेत के किनारों पर अलसी की बुवाई करें. जब खेत में इल्लियां अटैक करती हैं, तो वे सबसे पहले अलसी पर हमला करती हैं. अलसी की तेज गंध इल्लियों को मुख्य फसल तक पहुंचने नहीं देती. इससे फसल सेफ रहती है और कीटनाशकों पर खर्च घटता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए चना, सरसों और अलसी की अंतरवर्ती खेती एक नया मुनाफे का फार्मूला बनकर उभर रही है. वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर किसान एक ही खेत से तीन फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनकी आय दोगुनी हो रही है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बरकरार रह रही है. चना, सरसों और अलसी तीनों ही रबी सीजन की अहम फसलें हैं. चना दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाता है, जबकि सरसों तिलहनी फसल होने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी देती है. वहीं अलसी का पौधा खेत के किनारों पर प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिसकी तेज गंध से फसलों पर लगने वाली इल्लियां दूर रहती हैं.
इल्लियों से सुरक्षित रहेगी फसल
उन्होंने आगे बताया कि किसान तीन कूड़ चना, एक कूड़ सरसों और बॉर्डर पर अलसी की बुवाई करें. जब खेत में इल्लियों का हमला होता है, तो वे सबसे पहले अलसी पर अटैक करती हैं. अलसी की तेज गंध उन्हें मुख्य फसल चने तक पहुंचने नहीं देती. इससे फसल सुरक्षित रहती है और कीटनाशकों पर खर्च घटता है.
किसानों की आमदनी होगी दोगुनी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पद्धति किसान भाइयों को न केवल कम लागत में ज्यादा लाभ दिला रही है बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने और पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित हो रही है. विंध्य के कई किसानों ने इस तकनीक को अपनाकर अपनी आमदनी में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.