खंडवा. सांप का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है. वजह भी साफ है क्योंकि सांप का जहर इंसान की जान तक ले सकता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही डरावने दिखने वाले सांप हमारे पर्यावरण और खेती दोनों के लिए बेहद जरूरी हैं. यह बात सुनकर आपको हैरानी जरूर होगी लेकिन यह सच है कि सांप न केवल पर्यावरण का अहम हिस्सा हैं बल्कि ये किसानों के भी सच्चे दोस्त साबित होते हैं. सांप प्रकृति के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे मेढक, चूहे, छिपकली और अन्य छोटे जीवों को खाते हैं, जिससे इन जीवों की संख्या नियंत्रित रहती है. अगर सांप न हों, तो खेतों में चूहे और कीटों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि फसलें बर्बाद हो जाएंगी. इस तरह सांप प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण का काम करते हैं, यानी किसान जो काम रासायनिक दवाइयों से करते हैं, वही काम सांप बिना किसी खर्च के कर देते हैं.
सांप पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी मदद करते हैं. वे शिकारी भी हैं और कई बार खुद शिकार भी बन जाते हैं. इस कारण वे खाद्य श्रृंखला में एक अहम कड़ी हैं. उनके बिना जंगलों, खेतों और गांवों का संतुलन बिगड़ सकता है.
जहर से बनती हैं दवाइयां
सांपों का जहर केवल खतरनाक नहीं बल्कि जीवनरक्षक भी है. कई तरह की दवाइयां और इंजेक्शन सांप के जहर से ही तैयार किए जाते हैं. वैज्ञानिक रिसर्च में भी सांप के जहर का उपयोग कैंसर, दिल संबंधी और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है. भारत में करीब 300 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रजातियां जहरीली होती हैं. इन सांपों का जहर ही आधुनिक चिकित्सा में नई खोजों का रास्ता खोलता है.
जहां लोग सांप देखकर डर जाते हैं और उन्हें मारने की कोशिश करते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के मुश्ताक इन बेजुबान जीवों की जान बचाने का काम करते हैं. लोग उन्हें सर्पमित्र और खतरों के खिलाड़ी के नाम से जानते हैं. मुश्ताक पिछले 15 सालों से सांपों को बचाने और जंगल में सुरक्षित छोड़ने का काम कर रहे हैं. वह बिना किसी शुल्क के दिन हो या रात, जब भी किसी के घर या खेत में सांप दिखता है, तुरंत पहुंच जाते हैं और सावधानी से सांप को पकड़कर जंगल में छोड़ देते हैं.
‘अब इन जीवों की रक्षा करूंगा’
मुश्ताक ने लोकल 18 से कहा, ‘पहली बार मैंने देखा कि लोग एक सांप को मार रहे थे. मैंने उन्हें रोका लेकिन वे नहीं माने. उसी दिन मैंने ठान लिया कि अब इन जीवों की रक्षा करूंगा. मैंने किताबों और यूट्यूब से सांप पकड़ने की तकनीक सीखी. पहली बार नागपंचमी के दिन गांव में सांप पकड़ा और तब से मेरा आत्मविश्वास बढ़ता चला गया. आज मैं न सिर्फ अपने इलाके में बल्कि आसपास के गांवों में भी सांपों को बचाने के लिए जाता हूं.’
5000 से ज्यादा सांपों की बचाई जान
मुश्ताक ने कहा कि अब तक वह 5000 से ज्यादा सांपों की जान बचा चुके हैं. सांप भी इस धरती का हिस्सा हैं. इनका भी प्रकृति में उतना ही महत्व है, जितना किसी इंसान या जानवर का. अगर इन्हें मार दिया गया, तो पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा. उनकी इस निस्वार्थ सेवा के लिए स्थानीय लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं. वह लोगों को यह भी समझाते हैं कि हर सांप जहरीला नहीं होता और बिना वजह उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.
क्यों जरूरी है सांपों की रक्षा?
अगर सांप खत्म हो गए, तो खेतों में चूहों की भरमार हो जाएगी, जिससे अनाज का नुकसान बढ़ेगा. जंगलों में भी असंतुलन पैदा होगा क्योंकि हर जीव का इस धरती पर एक मकसद होता है. सांप उस मकसद को पूरा करते हैं. यही वजह है कि हमें सोचना होगा कि हम सांपों को दुश्मन नहीं बल्कि प्रकृति के प्रहरी मानें. जब भी किसी घर या खेत में सांप दिखे, तो उसे मारने की बजाय स्थानीय सर्पमित्र या वन विभाग को सूचना दें ताकि उस जीव की जान बचाई जा सके. सांप डर का नहीं बल्कि संतुलन का प्रतीक हैं. वे हमारी फसलों के रक्षक, पर्यावरण के प्रहरी और चिकित्सा विज्ञान के सहायक हैं. अब समय है कि हम अपने डर को समझ में बदलें. याद रखिए कि जहां इंसान प्रकृति से प्रेम करता है, वहां जीवन सुरक्षित रहता है, इसलिए सांपों को मारें नहीं बल्कि बचाएं.