जो गांव में नहीं थे, उनके खिलाफ भी FIR: नीमच के मोरवन में कपड़ा फैक्ट्री का विरोध, लोग बोले- डैम का पानी प्रदूषित नहीं होने देंगे – Madhya Pradesh News

जो गांव में नहीं थे, उनके खिलाफ भी FIR:  नीमच के मोरवन में कपड़ा फैक्ट्री का विरोध, लोग बोले- डैम का पानी प्रदूषित नहीं होने देंगे – Madhya Pradesh News


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ये सवाल नीमच जिले के मोरवन में रहने वाले 60 साल के दीपक गुर्जर का है। वे कहते हैं गुर्जरों के मोरवन, सांगानेर और पढ़ला गांव के लोगों ने बांध बनाने के लिए सहयोग भी दिया और श्रम भी किया था। पानी के लिए यह त्याग और सहयोग इसलिए किया था कि हमारी आने वाली पीढ़ी इसका सुख पाएगी, लेकिन अब तो हमसे हमारा पानी ही छीना जा रहा है।

वे कहते हैं कि फैक्ट्री लग जाएगी तो हमारा पानी तो जाएगा ही, और जो बचेगा, वह भी प्रदूषित हो जाएगा। अपने गांव के लिए दीपक की ये चिंता इसलिए है क्योंकि नीमच से 30 किमी दूर मोरवन में राजस्थान के भीलवाड़ा की सुविधि रेयान इंडस्ट्रीज यहां एक बड़ी इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल यूनिट लगा रही है। गांव के लोग इसके विरोध में हैं।

विरोध का ये सिलसिला बीते 6 नवंबर को हिंसक हो गया, जब प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना हुई। इस घटना के बाद पुलिस ने 35 से ज्यादा लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है, जिससे गांव में डर और तनाव का माहौल है। आखिर यह पूरा मामला क्या है? लोग इस टेक्सटाइल फैक्ट्री का विरोध क्यों कर रहे हैं? इस पर अधिकारियों का क्या कहना है?

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मोरवन पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट

गांव में शांति लेकिन हालात तनावपूर्ण जब हम मोरवन पहुंचे, तो गांव की मुख्य सड़क पर तीन-चार पुलिसकर्मी तैनात दिखे। माहौल शांत था, लेकिन यह शांति तनाव से भरी हुई थी। पूछने पर पता चला कि 6 नवंबर की घटना के बाद आंदोलन खत्म कर दिया गया है और बाजार आज ही खुला है। गांव में एक अनकहा डर पसरा हुआ था। मोरवन के पूरणमल अहीर हमें उस जगह ले गए, जहां फैक्ट्री का निर्माण कार्य चल रहा है।

उन्होंने बताया, ‘यह लगभग डेढ़ सौ बीघा जमीन है, जहां पहले हमारे मवेशी चरते थे। गांव के बच्चे यहां क्रिकेट खेलते थे, हमने एक सीमेंट की पिच भी बना रखी थी। लगभग डेढ़ महीने पहले यहां बाउंड्री वॉल बनना शुरू हुई। हमें कुछ समझ नहीं आया, क्योंकि काम पीछे की तरफ से शुरू हुआ था। करीब 25 दिन पहले जब सामने की ओर बाउंड्री बनने लगी, तब गांव वालों ने पूछा कि यहां क्या हो रहा है?

तब जाकर हमें पता चला कि एक टेक्सटाइल मिल बन रही है। गांववालों को जब इस परियोजना की भनक लगी, तो उन्होंने इसके विरोध में शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया।

फैक्ट्री का विरोध, ग्रामीण की 4 बड़ी चिंताएं मोरवन के लोगों का विरोध विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और आजीविका से जुड़ी तीन बड़ी चिंताओं को लेकर है।

1. डैम के पानी का फैक्ट्री में होगा इस्तेमाल मोरवन के कन्हैयालाल कहते हैं, ‘हम तो शुरू से ही बहुत साधारण सी मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। हमारी बस इतनी मांग थी कि फैक्ट्री गांव के रिहायशी इलाके से दूर बनाई जाए, मोरवन डैम का पानी फैक्ट्री में न लिया जाए, और फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी डैम में न डाला जाए। क्या इतनी सी मांग करना कोई गुनाह है?

राजकुमार अहीर इस चिंता को और विस्तार से समझाते हैं, ‘यह बांध आसपास के लगभग 15 गांवों की सिंचाई के लिए बनाया गया था। आज सरवानिया और जावद नगर पंचायत में पीने का पानी भी इसी डैम से जाता है। जब इन दो नगरों को पीने का पानी दिया गया, तो किसी ने विरोध नहीं किया, क्योंकि पानी प्राथमिकता है।

2. हमारा पानी क्रिस्टल क्लियर है, इसे केमिकल से बर्बाद न करें जावद के रहने वाले विनोद धाकड़ की चिंता भी इसी से जुड़ी है। वे कहते हैं, ‘हमारा पूरा जावद पीने के पानी के लिए मोरवन डैम पर ही आश्रित है। जब से फैक्ट्री की बात सामने आई है, जावद के लोग भी पानी के प्रदूषित होने को लेकर चिंतित हैं। इस डैम का पानी इतना साफ है कि आप कहीं से भी उठाकर पी सकते हैं, इसे फिल्टर करने की भी जरूरत नहीं होती।

यह क्रिस्टल क्लियर पानी है, जो जंगलों से बहकर आता है। मैं बचपन से इसी डैम का पानी पीकर बड़ा हुआ हूं। हम नहीं चाहते कि कोई फैक्ट्री खुले और केमिकल इस बांध को खराब करे और हम इसका प्रदूषित पानी पीकर बीमार पड़ें।’ इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अरविंद जाट इस डर को तकनीकी नजरिए से देखते हैं।

वे कहते हैं, ‘मैं जानता हूं कि जब फैक्ट्री लगेगी, तो चिमनी से धुआं और केमिकल युक्त पानी निकलेगा, जो हमारे ग्राउंड वाटर और डैम, दोनों को बर्बाद कर देगा। मैं बीटेक हूं और मैंने भीलवाड़ा के हमीरगढ़ में टेक्सटाइल मिलों का प्रदूषण देखा है। लोग वहां से भाग रहे हैं।

3.आबादी के बीच में बन रही फैक्ट्री मोरवन गांव के निवासी अरविंद जाट एक और बात की तरफ इशारा करते हैं। वे कहते हैं जहां फैक्ट्री बनाई जा रही है उससे करीब 500 मीटर दूरी पर जनकपुर और जगहपुर दो गांव हैं, जिनकी आबादी 2 हजार के करीब है। फैक्ट्री से 200 मीटर आगे गांव का हायर सेकेंडरी स्कूल है। फैक्ट्री से 100 मीटर पहले एक 10 बैड के सरकारी अस्पताल का निर्माण हो रहा है।

फैक्ट्री के सामने रोड के दूसरी तरफ सरकारी छात्रावास, गोशाला, पंचायत भवन है और फैक्ट्री से 100 मीटर दूरी पर ही मोरवन डैम है। यानी फैक्ट्री को ऐसी जगह बनाया जा रहा है जहां आसपास रिहायशी इलाका है। ऐसे में फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण से हर कोई प्रभावित होगा।

ये वो जगह है जहां फैक्ट्री का निर्माण प्रस्तावित है।

ये वो जगह है जहां फैक्ट्री का निर्माण प्रस्तावित है।

4. पुलिसिया कार्रवाई और झूठे मुकदमे 6 नवंबर की घटना के बाद पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसने गांव वालों के गुस्से और डर को और बढ़ा दिया है। कई लोगों का आरोप है कि निर्दोष और मौके पर मौजूद न रहने वाले लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। रामनारायण बताते हैं, ‘मेरा पोता 4 नवंबर से बाहर है। पोती शादी के बाद से ससुराल में है, लेकिन पुलिस ने उनका नाम भी एफआईआर में लिख दिया है।

पुलिस गांव में आकर धमकाती है कि विरोध मत करो, वर्ना सबको जेल में डाल देंगे। मोरवन के रतनलाल की कहानी तो और भी चौंकाने वाली है। वे कहते हैं, ‘मेरी किडनी खराब है और मैं डायलिसिस पर हूं। जिस दिन (6 नवंबर को) घटना हुई, मैं नीमच के जिला अस्पताल में डायलिसिस करवा रहा था। आप अस्पताल के रिकॉर्ड देख सकते हैं। फिर भी मेरे खिलाफ एफआईआर कर दी गई।

मेरा नाती, जो मुझे अस्पताल ले जाता है, उसका नाम भी लिख दिया है। हम बस अपना पानी बचाने की बात कर रहे हैं और हमें इस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है।’ इसी दौरान हमारी मुलाकात वीरेंद्र से हुई, जो गांव के बाहर से आ रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं 5 नवंबर को राजस्थान में एक शादी में गया था और आज ही लौट रहा हूं। मुझे दोस्तों से पता चला कि एफआईआर में मेरा नाम भी है।

अधिकारी बोले- लोगों को गुमराह किया गया मप्र औद्योगिक विकास निगम(एमपीआईडीसी) के राजेश राठौर कहते हैं कि मोरवन में सरकार की कोशिशों से एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट आया है। यह एक इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल इंडस्ट्री है, जिसमें फाइबर से लेकर कपड़ा तक सब कुछ यहीं बनेगा। इसमें प्रथम चरण में 350 करोड़ का निवेश होगा और लगभग 2000 लोगों को प्रत्यक्ष और 5000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

प्रदूषण की चिंताओं पर उन्होंने कहा, ‘फैक्ट्री में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्लांट लगेगा, जो 97% पानी को साफ कर देगा। बचे हुए ठोस कचरे को सीमेंट फैक्ट्री में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पीटीजेड कैमरे लगेंगे, जिसका फीड हम सार्वजनिक रूप से डिस्प्ले करने को भी तैयार हैं। बॉयलर में बायोफ्यूल (पराली) का इस्तेमाल होगा।

वहीं नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा का कहना है कि इंडस्ट्रियल डिपार्टमेंट ने जमीन का आवंटन किया है। हमने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से कहा कि वह दस्तावेजों की गहन जांच करें, ताकि जल या भूमि प्रदूषण की स्थिति न बने। पत्थर की रॉयल्टी चोरी की शिकायत पर भी माइनिंग अधिकारी जांच कर रहे हैं।

विधायक बोले- लोगों को समझना चाहिए स्थितियां बदल गईं

इधर पुलिस ने जो कार्रवाई की है उसे लेकर नीमच एसपी अंकित जायसवाल का कहना है कि 6 नवंबर को फैक्ट्री परिसर में तोड़फोड़ और कर्मचारियों से मारपीट की गई। ये उन्हीं लोगों ने किया जो कई दिनों से सक्रिय थे। जब तक सारी चीजें शांतिपूर्ण थीं, पुलिस भी सहयोग कर रही थी। हमने 28 लोगों पर नामजद और बाकी अन्य पर एफआईआर की है।

अगर किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से एफआईआर में दर्ज किया गया है, तो वह हमें सबूत के साथ आवेदन दे, हम जांच करेंगे। हमारा मकसद केवल अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है। वहीं मप्र सरकार के पूर्व मंत्री और जावद के विधायक ओमप्रकाश सखलेचा का कहना है कि शुरुआत में फैक्ट्री को लेकर गांव के लोगों को गुमराह किया गया था।

औद्योगिक विकास निगम की समझाइश के बाद अब सभी लोग मान गए हैं। प्रदूषण को लेकर लोगों की जो चिंता थी, वो दूर की गई है। फैक्ट्री जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर काम करेगी। बांसवाड़ा की फैक्ट्रियों की हालत देखकर जो लोग डरे हुए हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि अब स्थितियां काफी बदल गई हैं। पर्यावरण नॉर्म्स में भी काफी बदलाव हुए हैं।



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