MPPSC Success Story: पिता चलाते हैं अफसर की गाड़ी…अब बेटा बन गया अधिकारी, दिल जीत लेगी खंडवा के ऋतिक की कहानी

MPPSC Success Story: पिता चलाते हैं अफसर की गाड़ी…अब बेटा बन गया अधिकारी, दिल जीत लेगी खंडवा के ऋतिक की कहानी


Khandwa News: खंडवा के रूपसिंह सोलंकी का सीना गर्व से चौड़ा है. हो भी क्यों न, बेटा ऋतिक सोलंकी अफसर जो बन गया. बेटे ने अपने पिता के सपने का सम्मान रखा और कड़ी मेहनत कर मुकाम हासिल किया. लेकिन, इस पूरी कहानी की खास बात कुछ और है. दरअसल, रूपसिंह सोलंकी ड्राइवर हैं. वह प्रशासनिक अफसरों की गाड़ी चलाते हैं. अब उनका बेटा MPPSC 2023 पास कर जनपद पंचायत सीईओ बन चुका है. ऋतिक ने केवल अपनी लगन, विश्वास और यूट्यूब की मदद से यहां तक का सफर तय किया है. लेकिन, ऋतिक मंजिल IAS की कुर्सी है.

रूपसिंह सोलंकी कई वर्षों से प्रशासनिक सेवा में वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं. वे अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख (IAS) और एडीएम केआर बड़ोडे जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की गाड़ी चलाते रहे हैं. अफसरों के बीच रहकर उन्होंने ठान लिया था कि उनका बेटा भी एक दिन अफसर बनेगा. इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी और पत्नी की जरूरतों में कटौती की, कपड़ों और अन्य खर्चों से समझौता किया, यहां तक कि जमीन बेचकर बेटे को दिल्ली भेजा, ताकि वह दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में पढ़ाई कर सके और सिविल सेवा की तैयारी करे.

महंगी कोचिंग तक यूट्यूब ने पहुंचाया
ऋतिक ने डीयू से बीए किया और कॉलेज के साथ ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने न सिर्फ यूपीएससी बल्कि एमपीपीएससी की भी तैयारी की. उनका कहना है कि यूट्यूब और ऑनलाइन लेक्चर्स ने उनकी तैयारी में अहम भूमिका निभाई. जिन कोचिंग संस्थानों तक पहुंचना आर्थिक रूप से संभव नहीं था, वहां तक यूट्यूब ने उन्हें पहुंचा दिया. उन्होंने एनसीईआरटी की किताबों से मजबूत बेस बनाया और कोचिंग नोट्स के साथ निरंतर अध्ययन किया.

2022 में भी क्रैक किया था MPPSC
साल 2022 में ऋतिक ने एमपीपीएससी परीक्षा पास कर ट्रेजरी ऑफिसर (ATO) के रूप में चयन पाया. जुलाई 2024 में उन्होंने अलीराजपुर में अपनी पहली जॉइनिंग दी. लेकिन, उन्होंने वहीं रुकना मंजूर नहीं किया. एक साल बाद ही यानी 2023 की परीक्षा में उन्होंने दोबारा सफलता पाई और इस बार जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के पद पर चयनित हुए.
ऋतिक कहते हैं, “मेरे माता-पिता जैसे कोई नहीं. उन्होंने अपनी इच्छाओं का त्याग किया, ताकि मैं अपने सपनों को पूरा कर सकूं. अगर उन्होंने हिम्मत न दिखाई होती, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता।” पिता रूपसिंह सोलंकी की आंखों में आज गर्व है, क्योंकि उनके बेटे ने मेहनत और ईमानदारी से वह मुकाम हासिल किया है, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी.

इंटरव्यू में पूछे थे ये सवाल
ऋतिक बताते हैं कि जब वे इंटरव्यू देने गए थे, तो उनसे खंडवा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछे गए. जैसे, खंडवा के दादाजी धूनीवाले जी का आध्यात्मिक महत्व क्या है? तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर का योगदान क्या है? प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार का खंडवा से संबंध और जिले का आर्थिक ढांचा किस पर आधारित है? उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से सवालों के जवाब दिए.

पापा अफसरों से मिलवाते थे
ऋतिक ने कहा, “मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि ईमानदारी से काम करो और कभी हार मत मानो. जब भी नए कलेक्टर साहब या अफसर आते थे, तो मेरे पिताजी मुझे उनसे मिलवाते थे. उन्हीं अफसरों ने मुझे प्रेरित किया.” ऋतिक अब ग्रामीण विकास (Rural Development) के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं. उनका कहना है, “भारत का भविष्य गांवों में बसता है. अगर हम गांवों की समस्याओं का समाधान कर सकें, तो देश को विकसित भारत बनाने का सपना साकार होगा. मेरे कार्यकाल में मैं गांवों के विकास और स्वावलंबन की दिशा में ज्यादा काम करूंगा.”



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