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- Roseroti, The Future Of Children, Everything For The Capital Farmers For Treatment Was This Soybean, The Fire Had To Be Planted In It
उज्जैन5 मिनट पहले
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पिपलई गांव में एक एकड़ की सोयाबीन की फसल जलाते किसान।
घटि्टया तहसील के पिपलई गांव के किसान नरेंद्रसिंह झाला ने एक एकड़ की सोयाबीन फसल काटने की जगह खेत में ही जला दी। इसके लिए वे तीन महीने से मेहनत कर रहे थे। उनका कहना है कि अफलन के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने 97 दिन पहले 1040 किस्म की सोयाबीन की बोवनी की थी। वायरस के कारण फली नहीं आईं। जब तक सोयाबीन हरी थी, तब तक उन्हें उम्मीद थी कि फलियां आएंगी लेकिन जब पौधे सूखने लगे तो उनकी रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई। झाला अकेले ऐसे किसान नहीं हैं।
जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी फसल को खेत से खलिहान तक पहुंचाने की बजाए खुद नष्ट कर दिया। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वरिष्ठ वैज्ञानिक आरपी शर्मा के अनुसार सोयाबीन में अफलन के दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला- एक कीड़ा, जो सोयाबीन के फूलों को खा जाता है। इससे फल नहीं लग पाते। दूसरा एरियल ब्लाइट वायरस, जो सीधे फलियां आने के शुरुआती दौर में ही पौधों पर हमला कर फलियां खत्म कर देता है। इससे भी अफलन हो जाता है।
जिले में जवासिया कुमार और मानपुरा गांव में भी सोयाबीन को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है सबसे पहले पीलेमोजेक वायरस, अफलन, जलभराव तीनों प्राकृतिक आपदाओं के कारण इन गांव की लगभग 90 से 100 फीसदी सोयाबीन नष्ट हो गई है। किसान अजय पटेल ने बताया सबसे पहले हमारे गांव में पीले मोजैक वायरस की समस्या देखी गई, जिससे फसल पर खासा असर पड़ा था। उससे बची फसल में अफलन, जलभराव से किसानों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सर्वे के बाद राहत राशि दिलवाएं।
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