In February, the line was poured, filling the forgotten rain water started flowing from the side of the dam | फरवरी में डाली थी लाइन, भराव करना भूले बारिश का पानी डेम की साइड से बहने लगा

In February, the line was poured, filling the forgotten rain water started flowing from the side of the dam | फरवरी में डाली थी लाइन, भराव करना भूले बारिश का पानी डेम की साइड से बहने लगा


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उज्जैन2 घंटे पहले

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शिप्रा नदी के समानांतर सीवरेज पाइप लाइन के लिए खुदाई की लेकिन भराव नहीं होने से अब कटाव होने लग गया है।

  • गऊघाट डेम के पास से शिप्रा बदल रही रास्ता, सीवरेज लाइन की खुदाई से कटाव शुरू

गऊघाट स्टापडेम पर शिप्रा रास्ता बदल रही है। यहां नदी किनारे डाली गई सीवरेज पाइप लाइन की खुदाई के कारण बारिश में कटाव शुरू हो गया है। गड्‌ढों के कारण शिप्रा का पानी डेम के एक किनारे पर मिट्‌टी काटकर बहने लगा। इससे डेम को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।

शहर में अमृत मिशन के तहत सीवरेज लाइन डाली जा रही है। इसकी मेन ट्रंक लाइन नदी किनारे डाली जाना है। मेन ट्रंक लाइन तक शहर का सीवरेज लाने के लिए छोटी-बड़ी दूसरी पाइप लाइनें भी डल रही है। यह काम टाटा प्रोजेक्ट्स को दिया गया है। करीब 400 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में कंपनी अलग-अलग स्थानों पर लाइनें डालने में जुटी है। इसी क्रम में कंपनी ने फरवरी में चिंतामन रोड से गऊघाट स्टापडेम तक पाइप लाइन डाली थी।

इसके लिए गऊघाट रोड से लेकर स्टापडेम के समीप तक खुदाई की गई थी। पाइप लाइन डालने के बाद कंपनी को भराव करना था। लेकिन कंपनी पाइप लाइन डाल कर भूल कर गई।

बाढ़ आई तो कटाव डेम तक पहुंचेगा
नदी के किनारे बड़े गड्‌ढे होने से बारिश के दौरान शिप्रा की बाढ़ का पानी इन गड्ढों में भर गया और वहीं से बहाव होने लगा। बाढ़ से किनारे पर कटाव होने लगा। मौजूदा स्थिति में डेम के मेन रोड वाले किनारे पर कटाव को देखा जा सकता है। ऐसा लग रहा है मानो यहां से नदी रास्ता बदलने लगी है। जानकारों का कहना है यदि एक दो बार और तेज बारिश हुई और शिप्रा में बाढ़ आई तो यह कटाव डेम के दूसरी तरफ तक पहुंच सकता है। रविवार को भी देवास डेम के गेट खोलने से शिप्रा का जल स्तर बढ़ गया। गाैरतलब है कि इसी डेम से जलप्रदाय के लिए भी पीएचई पानी लेता है।

20 फीट खुदाई कर डाले पाइप
फरवरी में यहां 20 फीट खुदाई कर पाइप डाले थे। गहराई तक खुदाई से डेम के राइट साइट कटाव हो रहा है। पीएचई अमले का कहना है कि यह कटाव नीचे से मिट्टी काटेगा। जब डेम के गेट बंद होंगे। तब पानी का दबाव बढ़ेगा। इससे डेम को खतरा हो सकता है, क्योंकि यदि नीचे से मिट्टी सरकती जाएगी तो डेम को मजबूती देने वाली राइट रिंग कट जाएगी। इस डेम की कुल ऊंचाई 16 फीट है। जबकि इसके पास 20 फीट गहराई तक मिट्‌टी खोद दी गई है। स्टापडेम प्रभारी संतोष दायमा कहना है कि अनेक बार ठेकेदार को मौका मुआयना करा दिया है। अब तक ठेकेदार ने भराव की कोशिश नहीं की है।

मेन होल बनना बाकी, काम रोका
इधर टाटा प्रोजेक्ट्स के इंजीनियर आशीष सिंघई का कहना है कि यहां मेन ट्रंक लाइन डाली है। इसमें अभी मेन होल भी बनना है। इसलिए गड्ढों का भराव नहीं किया गया है। लगातार बारिश के कारण भी काम नहीं हो पा रहा। नदी किनारा होने से वहां तक मशीनें नहीं जा पा रही। इन गड्ढों के कारण डेम को कोई खतरा नहीं है। कंसल्टेंट कंपनी के इंजीनियर मोहित शर्मा बताते हैं कि यहां पर मेन ट्रंक लाइन का काम लगातार होना है। ऊपरी हिस्से में भराव करने की कोशिश की थी लेकिन बारिश के कारण काम रोकना पड़ा। बारिश थमने के बाद काम शुरू होगा। इसके लिए तैयारी कर ली गई है।

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