भोपाल की घनी आबादी वाली नरेला विधानसभा सीट का वार्ड नंबर 75। यहां की रतन कॉलोनी की तंग गलियों में मकान नंबर 1 और 2 बड़े स्पेशल है। साल 2025 की आधिकारिक वोटर लिस्ट के अनुसार, इन दो छोटे-छोटे घरों में 30 अलग-अलग जातियों के 158 लोग रहते हैं। और तो और, अ
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यह चौंकाने वाला आंकड़ा तब और भी हैरान करता है जब आप हकीकत से रूबरू होते हैं। इन घरों में बमुश्किल 10-12 लोग ही रह सकते हैं। जब चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) धमीषा कुशवाह यहां पहुंचीं और वोटर्स के नाम पुकारना शुरू किया, तो मकान नंबर 1 से एक बुजुर्ग अम्मा बाहर निकलीं।
उन्होंने लिस्ट में से सिर्फ 4 लोगों को अपने परिवार का सदस्य बताया। बाकी 100 नामों को सुनकर उनका चेहरा अनजान था।
चक्की चलाने वाली अम्मा 100 नाम सुनकर हैरान रह गई।
आयोग के मुताबिक एमपी में ऐसे 8 लाख पते यहां सवाल उठता है कि ये 100 लोग कौन हैं? क्या ये फर्जी वोटर हैं, जैसा कि विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं? या यह केवल एक क्लेरिकल मिस्टेक है? या फिर इसके पीछे कोई और वजह है? यह सिर्फ एक वार्ड या एक मकान की कहानी नहीं है। चुनाव आयोग के अपने आंकड़े बताते हैं कि पूरे मध्यप्रदेश में 8 लाख से ज्यादा पते इसी तरह की गड़बड़ियों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या SIR की यह प्रक्रिया, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, इस समस्या को सुलझा पाएगी? क्या गलत पते सही हो जाएंगे? क्या इन ‘अदृश्य’ वोटरों के नाम लिस्ट से कटेंगे या बने रहेंगे? दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए जमीनी पड़ताल की और आयोग के अफसरों से बात की।

जहां एक चक्की की दुकान पर रजिस्टर्ड हैं 104 वोटर यह जानने के लिए कि क्या वाकई एक घर में 21 जातियों के लोग रह सकते हैं, हमारी टीम ने सात दिन में तीन बार इसकी पड़ताल की…
पहली बार : टीम ने घर जाकर रैकी की भास्कर की टीम वार्ड 75 के मकान नंबर 1 पर पहुंची। इसके ग्राउंड फ्लोर पर एक छोटी सी चक्की की दुकान है, जिसे एक बुजुर्ग महिला चलाती हैं। जब हमने उनसे वोटर लिस्ट के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ कहा, ‘हमने कभी अपना घर किराए पर नहीं दिया। यहां सिर्फ हमारा परिवार ही दशकों से रह रहा है।’ सच्चाई भी यही थी। लगभग एक हजार स्क्वायर फीट के इन घरों में 10-12 लोगों से ज्यादा का रहना लगभग असंभव है।

बीएलओ धमीषा कुशवाह मकान नंबर 1 में रहने वाले 104 लोगों के गणना पत्रक लेकर पहुंची।
दूसरी बार: टीम बीएलओ के साथ पहुंची अगले दिन हम बीएलओ धमीषा कुशवाह के साथ फिर उसी पते पर पहुंचे। उन्होंने अपने गणना पत्रकों में से मकान नंबर 1 से जुड़े करीब 100 से ज्यादा फॉर्म अलग निकाले। एक-एक कर नाम पुकारे गए, लेकिन उस घर से सिर्फ 4 लोगों के ही फॉर्म लिए गए। मकान नंबर 2 का भी यही हाल था।
तीसरी बार: बीएलओ बोलीं- कुछ लोगों ने संपर्क किया सात दिन बाद जब हमने बीएलओ से दोबारा संपर्क किया, तो उन्होंने बताया, ‘उन 100 लोगों में से कुछ वोटर इसी वार्ड में दूसरे बूथों पर मिले हैं। कुछ पहले यहां किराए पर रहते थे और अब शहर छोड़कर चले गए हैं।कुछ ने मुझसे फॉर्म लेने के लिए संपर्क किया है। एक बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की है जिनका कोई अता-पता नहीं है। न तो उनके कभी इस वार्ड में रहने की पुष्टि हुई, न ही उन्होंने हमसे संपर्क किया।

मैं शर्मा, मेरे घर पर सिंह और पांडे भी रजिस्टर्ड हैं यह समस्या सिर्फ नरेला तक सीमित नहीं है। भोपाल उत्तर विधानसभा के बरेला गांव में भी यही स्थिति है। यहां मकान नंबर 100 की वोटर लिस्ट में 9 जातियों के 38 लोग रजिस्टर्ड थे। घर में रहने वाले यादव परिवार ने बताया कि उन्होंने कभी किसी को किराए पर नहीं रखा। हमने पास की चक्की की दुकान चलाने वाले रवि से इन नामों के बारे में पूछा।
उन्होंने लिस्ट के लगभग हर वोटर को पहचान लिया और बताया कि वे सभी इसी मोहल्ले में अलग-अलग घरों में रहते हैं। कुछ लोग दूसरी जगह चले गए हैं। इसी वार्ड के कम्युनिटी हॉल में हमें घनश्याम शर्मा मिले, जो अपना फॉर्म ढूंढ रहे थे। उन्होंने अपनी पीड़ा बताई, ‘मेरा मकान नंबर 152 है। जब मैंने अपने परिवार के फॉर्म तलाशे, तो पता चला कि मेरे ही पते पर कोई सिंह, कोई पांडे भी रजिस्टर्ड है।

इस केस से समझिए पता बदलवाना आसान नहीं इसी हॉल में हमें राजेश रैकवार मिले। राजेश पहले जिस घर में किराए पर रहते थे, वही पता उनकी वोटर आईडी समेत सभी दस्तावेजों में दर्ज है। एक साल पहले उन्होंने अपना घर खरीद लिया, लेकिन पता नहीं बदलवाया। वे कहते हैं, ,पता बदलवाना बहुत कठिन काम है। अगर वोटर आईडी में बदलवाएंगे, तो आधार कार्ड, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस, सब जगह बदलवाना पड़ेगा। यह एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है। इसीलिए लोग इससे बचते हैं।
क्या SIR प्रक्रिया से सुलझेगी यह गुत्थी? जब हमने बीएलओ अनीता रायकवार से पूछा कि एक ही पते पर इतने नाम कैसे दर्ज हैं, तो उन्होंने बताया, ‘यह सालों से चली आ रही समस्या है। पुराने किराएदार बिना पता बदले चले गए। कई बार जब वोटर आईडी बनती थी, तो सही मकान नंबर न होने पर एक ही प्रमुख पते पर कई लोगों को दर्ज कर दिया जाता था। हम लोगों से कहते हैं कि अपना पता बदलवा लें, लेकिन वे तैयार नहीं होते।’

वोटर लिस्ट में एक ही पते पर कई लोगों के नाम दर्ज हैं।
BLO बोलीं- SIR का मकसद वोटर वैरिफिकेशन बीएलओ अनिता रायकवार ने बताया कि अभी जो SIR प्रक्रिया चल रही है, उससे किसी का भी पता नहीं बदला जाएगा। इस प्रक्रिया का मकसद सिर्फ यह वेरिफाई करना है कि वोटर जीवित है और उसका नाम लिस्ट में रहना चाहिए या नहीं। पते का कॉलम इस फॉर्म में है ही नहीं। यानी, अगर नरेला के मकान नंबर 1 पर रजिस्टर्ड 104 लोग कहीं से भी अपना गणना फॉर्म भरकर बीएलओ को जमा कर देते हैं, तो उनका वेरिफिकेशन हो जाएगा और वे उसी गलत पते पर वोटर बने रहेंगे।

आयोग के अफसरों से 4 सवाल….. यदि एक ही पते पर 100 से ज्यादा वोटर बने रहेंगे तो फिर SIR की प्रक्रिया का क्या औचित्य? इसे समझने के लिए भास्कर ने आयोग के अफसरों से ये 4 सवाल पूछे…
सवाल 1: वोटर लिस्ट में पते की इस तरह की गलतियां आखिर हुईं कैसे? जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हैं। पहला, किराएदार जो मकान बदलने के बाद अपना पता अपडेट नहीं करवाते। दूसरा, पुराने समय में जब घर-घर जाकर वोटर आईडी बनती थी, तब कई घरों के नंबर नहीं थे, इसलिए एक ही लैंडमार्क या प्रमुख पते पर आसपास के कई लोगों को दर्ज कर दिया गया। तीसरा, मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में वोटरों के पास खुद का मकान नहीं था, उन्हें ‘0’ मकान नंबर अलॉट किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
सवाल 2: तो क्या इस SIR प्रक्रिया के बाद एक घर में कई जातियों वाली समस्या दूर हो जाएगी? जवाब: बिल्कुल नहीं। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य पते को सुधारना नहीं, बल्कि वोटर को वेरिफाई करना है। बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म देंगे। अगर वोटर वह फॉर्म भरकर जमा कर देता है, तो उसका नाम लिस्ट में बना रहेगा, चाहे उसका पता कुछ भी हो। फॉर्म भरने वाला एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर भी करता है कि दी गई जानकारी सही है। जिन लोगों के फॉर्म भरकर जमा नहीं होंगे, केवल उनके नाम ही अंततः लिस्ट से कटेंगे।

बीएलओ मतदाताओं को फॉर्म भरने की प्रक्रिया भी समझा रहे हैं।
सवाल 3: जब साफ दिख रहा है कि 3 कमरों के घर में 100 लोग नहीं रह सकते, तब भी क्या उनके फॉर्म मिलने पर वे वेरिफाई हो जाएंगे? जवाब: हां। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में इस लॉजिक का कोई स्थान नहीं है। अगर सभी 100 रजिस्टर्ड लोगों के गणना फॉर्म भरकर बीएलओ को मिल जाते हैं, तो वे सभी वेरिफाई माने जाएंगे। प्रक्रिया दस्तावेजी है, भौतिक सत्यापन पर आधारित नहीं।
सवाल 4: अगर कोई अपना पता बदलवाना चाहे, तो क्या करे? जवाब: हां, पता बदलवाया जा सकता है, लेकिन यह SIR प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इसके लिए अलग से फॉर्म-8 भरना होगा। लेकिन इसमें एक पेंच है। वोटर लिस्ट में पता तभी बदलेगा जब आपके सहायक दस्तावेजों, जैसे आधार कार्ड, में नया पता दर्ज हो। यानी पहले आपको अन्य सभी सरकारी दस्तावेजों में अपना पता बदलवाना होगा, उसके बाद ही वोटर लिस्ट में बदलाव संभव है।

वोटर लिस्ट में अपना नाम तलाशने के लिए लोग बीएलओ के पास पहुंच रहे हैं।