Last Updated:
Indore News: इंदौर का नेहरू पार्क शहर के सबसे पुराने और सबसे बड़े सार्वजनिक उद्यानों में से एक है, जो दशकों से लोगों खासकर बच्चों के लिए एक महत्वपूर्णस्थल रहा है, यहां कई सांस्कृतिकगतिविधियां भी होती है.
इंदौर की रफ्तार भरी दौड़ती भागती जिंदगी में शहर के बीचो-बीच मौजूद है शांति और सुकून देने वाला एक उद्यान. इंदौर का नेहरू पार्क शहर के सबसे पुराने और सबसे बड़े सार्वजनिक उद्यानों में से एक है, जो दशकों से लोगों खासकर बच्चों के लिए एक महत्वपूर्णस्थल रहा है, यहां कई सांस्कृतिकगतिविधियां भी होती है.
नेहरू पार्क का नाम भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर रखा गया है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है. यह पार्क न केवल एक ग्रीन क्षेत्र है बल्कि शहर की विरासत का एक हिस्सा है. इसकी विशालता के चलते अक्सर लोग ‘बड़ा पार्क’ के नाम से भी जानते हैं. यह शहर के बिल्कुल केंद्र में स्थित है जिससे या आना सभी के लिए सुलभ होता है. रेलवे स्टेशन के पास में होने की वजह से यात्रियों को भी यहां ठहरने में आसानी रहती है. यहां पुराने पेड़ों की छांव के साथ ही शांति और सुकून भी मिल जाता है. वर्षों से यह उद्यान सुना और बंजर था. लेकिन हाल ही में इसमें नर्सरी से पौधे लगाकर करीब 3 महीने की कड़ी मेहनत से फिर ये खिस उठा है.
प्रधानमंत्री नेहरू के सम्मान में नेहरू पार्क रखा
इसकी स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी तब इसे बिस्को पार्क के नाम सए जाना जाता था. यह विशेष रूप से ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों के मनोरंजन के लिए आरक्षित था. उस समय भारतीय नागरिकों के लिए यहां प्रवेश पर कड़ा प्रतिबंध था. 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, यह पार्क आम जनता के लिए खोल दिया गया. इसका नाम बदलकर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सम्मान में नेहरू पार्क रखा गया.
सुबह 11:00 से रात 8:00 बजे तक ट्रेन संचालित
पार्क के अंदर ही एक टॉय ट्रेन चलती है, यह बच्चों के लिए बड़ा ही आकर्षण का केंद्र है ट्रेन को रियल टच देने के लिए इसे कत्रिम टनल के बीच से गुजर जाता है, साथ ही करीब 800 मीटर लंबे इस ट्रैक पर सजावट टाइम भी की गई है. सुबह 11:00 से रात 8:00 बजे तक ट्रेन संचालित होती है. जिसका किराया कर मात्र 30 रुपए है। वैसे ट्रेन चालू से चलती आ रही है परंतु 2010 में इसका संचालन रोक दिया गया था. 2030 से फिर से शुरू किया गया अब इसका नाम वंदे भारत की तर्ज पर ‘वंदे इंदौर’ रखा गया है.