प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में भर्ती कबड्डी की नेशनल प्लेयर को एक्सपायरी दवाई चढ़ाए जाने के मामले में मरीज की हालत फिलहाल ठीक बताई जा रही है। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जिम्मेदार स्टाफ यह दावा कर रहा है कि खिलाड़ी को एक्सपायर्ड दवाई चढ़ाई ही नहीं गई, लेकिन वार्ड 21 में एक्सपायरी बैच की मौजूदगी और दवा के उपयोग की आशंका ने पूरे सिस्टम पर संदेह बढ़ा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दवा खरीद विभाग से लेकर सप्लाई चेन और फिर वार्ड तक एक्सपायरी दवाई का पूरा लॉट पहुंचा कैसे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो दवा खरीदी, सप्लाई सिस्टम और वार्ड-स्तर पर निगरानी में आई सभी खामियों की जांच करेगी।
इस बीच जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बजाय अस्पताल प्रशासन फिलहाल वार्डों में भरी पड़ी एक्सपायर्ड और जल्द एक्सपायर होने वाली दवाइयों की जांच में जुट गया है। स्टोरों से एक्सपायरी दवाएं निकालकर बायो-वेस्ट में नष्ट की जा रही हैं।
मरीज रोशनी जो वार्ड 21 में एडमिट है।
जानिए, कैसे हुई लापरवाही पर लापरवाही…
दवा खरीद में चूक
अस्पताल के लिए दवाइयां MPPHCL के माध्यम से खरीदी जाती हैं। सेंट्रल स्टोर के नोडल अधिकारी और असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट डॉ. महेश खचरिया के पास इसकी जिम्मेदारी है। एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक के वार्ड तक पहुंचने की गंभीर गलती कैसे हुई।
स्टॉक एंट्री और रिकॉर्ड में गड़बड़ी
सभी दवाइयों के एंट्री बेच नंबर, एक्सपायरी डेट, कंपनी सहित जरूरी जानकारी ऑनलाइन स्टॉक रजिस्टर में दर्ज होती है। फिर भी एक्सपायर्ड दवाएं वार्ड तक कैसे पहुंच गईं, यह रिकॉर्ड सिस्टम में मॉनिटरिंग की बड़ी खामी है।
स्टोर प्रबंधन की चूक
स्टोर इंचार्ज और नर्सिंग ऑफिसर का काम दवाइयों का स्टॉक देखना और वार्डों तक सप्लाय कराना है। नोडल अधिकारी और स्टोर इंचार्ज के पास एक्सपायर होने वाली और एक्सपायर्ड दवाइयों की ऑटो-जनरेटेड लिस्ट होती है, इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया।
फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ में दोहरी गलती
फार्मासिस्ट दवाई जारी करने के जिम्मेदार हैं जबकि नर्सिंग ऑफिसर उसे वार्ड में लेकर जाते हैं। अगर एक्सपायर्ड दवाई वार्ड 21 तक पहुंची, तो यह दोहरी लापरवाही है। यानी फार्मासिस्ट ने एक्सपायर्ड दवा जारी कर दी और नर्सिंग ऑफिसर ने उसे बिना जांचे वार्ड तक पहुंचा दिया।
मॉनिटरिंग की चूक
अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव को नियमित रूप से एक्सपायर्ड और जल्द एक्सपायर होने वाली दवाइयों की रिपोर्ट मिलती है और वे खुद उसकी मॉनिटरिंग करते हैं। वार्डों में एक्सपायर्ड दवाई का मिलना सवाल खड़े कर रहा है।

महिला के पति का आरोप है कि वॉर्ड में उस वक्त कई मरीज भर्ती थे। सभी को एक्सपायर्ड दवा ही चढ़ाई गई।
…और यह गंभीर चूक
ड्यूटी नर्स ने एंटीबायोटिक Cipro की एक्सपायरी चेक किए बिना उसे मरीज को लगा दिया, जो प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है। महिला के पति सागर का दावा है एक्सपायर्ड दवाई चढ़ा दी गई थी। फिर बाद में निकाल दी गई जबकि सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का स्पष्ट कहना है कि एक्सपायरी दवाई चढ़ाई ही नहीं गई। जैसे ही नर्स ने उसकी एक्सपायरी तारीख देखी तो हटाकर दूसरी लगाई। ऐसे में सवाल यह है इसी एंटीबायोटिक Cipro का एक बड़ा लॉट वहीं रखा था जिसका वीडियो सामने आया है। ऐसे में क्या सच है, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज और दवाई खरीद से यूनिट तक सप्लाय नेटवर्क में खंगाले जा सकता है क्योंकि एक्सपायरी Cipro का लॉट तो मिला है।

एक्सपायर्ड दवाईयों के लॉट का एक वीडियो भी सामने आया था।
SSH में एक्सपायर्ड दवाइयां मिलने पर हटा दिया था सुपरिटेंडेंट को
इसी साल सरकारी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल (SSH) के स्टोर में एक्सपायर्ड दवाइयां मिलने पर सुपरिटेंडेंट डॉ. सुमित शुक्ला को हटा दिया था। ऐसा ही मामला अब एमवायएच में हुआ है। यहां तो स्टोर से लेकर वार्ड 21 तक एक्सपायरी दवाई का लॉट पहुंचा दिया गया। यही नहीं मरीज को यह दवाई चढ़ा भी दी। ऐसे में पांच से ज्यादा स्टाफ पर विभागीय कार्रवाई किए जाने के संकेत हैंं।
अब आगे क्या?
जांच समिति अब बयान लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसमें मरीजों के परिजन और स्टाफ दोनों के बयान ही अहम रहेंगे। खास बात यह कि नेशनल प्लेयर को एक्सपायरी दवाई चढ़ाने के 48 घंटे बाद कोई रिएक्शन नहीं हुआ, यह अच्छा रहा। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन के लिए यह पहलू जहां अच्छा है वहीं साफ इनकार किया जा रहा है कि एक्सपायर्ड दवाई चढ़ाई ही नहीं गई। यही जांच का खास पॉइंट है। फिर भी एक्सपायर्ड दवाई का लॉट यूनिट तक तो पहुंचा है, ऐसे में जिम्मेदारों पर कार्रवाई संभव है।