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Sidhi News: मध्य प्रदेश में खाद संकट के बीच सहकारी समितियां किसानों का बड़ा सहारा बनी हैं. यहां सदस्य किसानों को उधार खाद-बीज, नकद ऋण, सब्सिडी और कई सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं, जिससे बुवाई के समय उन्हें बड़ी राहत मिल रही है.
मध्य प्रदेश में धान कटाई खत्म होते ही रबी सीजन की बुवाई शुरू हो गई है. लेकिन, इसी बीच खाद का संकट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं. हालांकि सरकार की योजनाओं और सहकारी समितियों के माध्यम से किसान उधार में खाद, बीज और नकद राशि प्राप्त कर सकते हैं. जिसे फसल पकने के बाद लौटाना होता है.
सहकारी समिति प्रबंधक द्वारिका टेकराम ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि समिति के सदस्य किसानों को रियायती दरों पर खाद-बीज, नकद ऋण और अन्य सरकारी सुविधाएं आसानी से मिलती हैं. समय पर ऋण चुकाने पर किसानों को खाद-बीज पर 10% तक सब्सिडी भी दी जाती है. खरीफ सीजन में किसानों को ₹32,123 प्रति हेक्टेयर की नकद सहायता तक उपलब्ध होती है.
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उधार में खाद पाने के लिए किसान को पहले समिति का सदस्य बनना पड़ता है. आधार कार्ड, खतौनी और नाममात्र शुल्क के बाद सदस्यता मिल जाती है. यदि कोई पुराना ऋण बकाया है तो उसे चुकाना जरूरी है. डिफॉल्टर न होने वाले किसानों को आसानी से उधार खाद उपलब्ध हो जाती है. वितरण खतौनी में दर्ज रकबे के आधार पर किया जाता है. सहकारी समितियां किसानों को खाद-बीज के साथ-साथ बचत खाते, बिल भुगतान, बीमा और कम ब्याज पर ऋण जैसी सुविधाएं भी देती हैं. वर्तमान खाद संकट के बीच ये समितियां किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद और सुलभ सहारा बनकर उभर रही हैं.