खंडवा. निमाड़ सहित मध्य प्रदेश के कई इलाकों में इन दिनों किसानों का रुझान तेजी से अगेती फसलों की ओर बढ़ रहा है. इसका कारण बिल्कुल साफ है—इन फसलों में कम लागत, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफा मिलता है. इन्हीं में से एक है चुकंदर (Beetroot), जो अब किसानों के लिए ‘कमाई का नया आधार’ साबित हो रही है. इसका बाजार में सालभर अच्छा भाव मिलता है और मांग लगातार बनी रहती है. सब्जी, सलाद, जूस, मिठाइयाँ, रंग बनाने से लेकर हेल्दी डाइट तक चुकंदर हर जगह उपयोगी है, तो आइए जानते हैं कि क्यों यह फसल किसानों की पहली पसंद बन रही है और 50 दिन में कैसे तैयार होती है यह मुनाफे की खेती.
क्यों है चुकंदर किसानों के लिए फायदेमंद फसल?
निमाड़ खेती-किसानी का बड़ा क्षेत्र माना जाता है. यहां के किसान कम समय में ज्यादा आय देने वाली फसलों की तलाश में रहते हैं. चुकंदर उनमें सबसे आगे है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह हर मौसम में मांग वाली फसल है और बाजार में इसके दाम स्थिर रहते हैं.
एक्सपर्ट जय कृषि किसान क्लीनिक के सुनील पटेल बताते हैं कि चुकंदर की खेती किसानों के लिए ‘लो कॉस्ट–हाई प्रॉफिट’ का बेहतरीन मॉडल है. उनके अनुसार-“चुकंदर की खेती में खर्च कम और उत्पादन ज्यादा मिलता है. 50 से 60 दिन में फसल तैयार हो जाती है. किसान चाहे तो इसे रबी के साथ-साथ खरीफ में भी उगा सकते हैं.’’
कैसा चाहिए खेत और मिट्टी?
चुकंदर हल्की, दोमट और रेतीली मिट्टी में बहुत अच्छा उत्पादन देता है.
मिट्टी का pH स्तर 6 से 7.5 तक होना चाहिए.
खेत में पानी निकासी की व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी फसल को खराब कर सकता है.
कितनी लागत और कितनी मेहनत?
चुकंदर की खेती को कम लागत वाली फसल माना जाता है.
एक एकड़ में कुल लागत लगभग 7 से 10 हजार रुपये तक आती है.
इसमें बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई का साधारण खर्च शामिल है.
फसल में रोग–कीट लगने का खतरा भी बहुत कम होता है, इसलिए दवा का खर्च भी बच जाता है.
किसानों को 15 दिन के अंतराल पर सिर्फ दो बार हल्की सिंचाई करनी होती है. यही वजह है कि यह फसल उन किसानों के लिए भी बढ़िया है जिनके पास सीमित पानी की सुविधा है.
बीज और बोनी का सही समय
➡ अक्टूबर से दिसंबर अगेती चुकंदर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है.
➡ बीज दर: प्रति एकड़ लगभग 3 से 4 किलो बीज पर्याप्त है.
➡ लाइन से लाइन की दूरी: 30 से 40 सेंटीमीटर
➡ पौधे–पौधे में दूरी: 10 सेंटीमीटर
ऐसा करने से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और जड़ों का आकार बड़ा बनता है.
उपज कितनी मिलती है?
चुकंदर की उपज किसानों के लिए सबसे बड़ा लाभ है.
एक एकड़ में किसान आराम से 120 से 150 क्विंटल तक उत्पादन ले सकता है.
बाजार में चुकंदर का औसत भाव 10 से 25 रुपये प्रति किलो तक मिलता है.
इस हिसाब से किसान प्रति एकड़ 1.20 लाख से 2 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर सकता है. लागत घटाने के बाद भी किसान का मुनाफा दोगुना से ज्यादा होता है.
चुकंदर के उपयोग से बढ़ती मार्केट डिमांड
चुकंदर की मांग सिर्फ सब्जी मंडियों तक सीमित नहीं है.
जूस सेंटर
सलाद काउंटर
रेस्टोरेंट
मिठाई उद्योग
हेल्थ सप्लीमेंट
आयुर्वेदिक कंपनियाँ
इन सभी जगह इसकी खपत लगातार बढ़ रही है. इसके कारण किसान को बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती और फसल उसी समय बिक जाती है.
किसानों का अनुभव
निमाड़ के कई किसान बताते हैं कि चुकंदर की अगेती फसल का चक्र तेज़ है. इससे उन्हें साल में दो से तीन फसलें लेने का मौका मिलता है. कुछ किसान इसे आलू और प्याज की तरह नकद फसल के रूप में भी उगा रहे हैं.
कम लागत, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफे वाली फसल की तलाश में हैं तो चुकंदर की अगेती खेती एक बेहतरीन विकल्प है. तेजी से बढ़ती मांग, 50 दिन में फसल तैयार, रोग–कीट का कम खतरा और ऊंची उपज—ये सभी कारण इसे किसानों की नई पसंद बना रहे हैं.अगर किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और समय पर सिंचाई–खाद दें, तो यह फसल उन्हें कम समय में अच्छा आर्थिक लाभ दे सकती है.