राजगढ़ पुलिस ने किसानों से करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। विशेष अभियान ‘ऑपरेशन किसान रक्षक’ के तहत उत्तर प्रदेश से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह “फॉर्मर फर्स्ट च्वाइस” और “ब्राइट इंडिया एग्रोटेक” जै
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पुलिस ने गिरोह से कुल 26 लाख 72 हजार रुपए का सामान जब्त किया है, जिसमें 16 लाख 16 हजार रुपए नकद, एक 10 लाख रुपए की i20 कार और 28 मोबाइल फोन शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक राज्य में तीन-चार महीने तक रुकता था। वे किसानों को सब्सिडी, उन्नत पौधों, पॉलीहाउस और फ्रेंचाइजी जैसी सरकारी योजनाओं का लालच देते थे। उनका मुख्य लक्ष्य किसानों की मेहनत की कमाई लूटना था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल और नगदी जब्त की।
पहचान छिपाने जगह, पहचान नाम बदले गिरोह अपनी पहचान छिपाने के लिए हर जगह नया नाम, नए मोबाइल नंबर, फर्जी आईडी और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। वे किराए के कमरों में रहते थे, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता था।
ठगी के लिए, गिरोह सबसे पहले ऐसे जिले चुनता था जहाँ उन्हें कोई पहचानता न हो। किसानों का भरोसा जीतने के लिए वे पेशेवर लेटरहेड, बैनर और विजिटिंग कार्ड तैयार करते थे। वे गरीब लोगों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड भी खुलवाते थे ताकि अपनी असली पहचान छिपाई जा सके।

इस अभियान में भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों का सम्मान किया गया।
गांवों में जाकर किसानों से करते थे संपर्क इसके बाद, गिरोह के सदस्य गांवों में जाकर किसानों से संपर्क करते और सरकारी योजना जैसा माहौल बनाते थे। वे सर्वे, रसीद और एग्रीमेंट के नाम पर किसानों से पैसे ऐंठते थे और तुरंत उन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते थे। रकम जमा होते ही पूरा गिरोह रातों-रात उस क्षेत्र को छोड़कर फरार हो जाता था।
वर्ष 2024 में यह गिरोह खंडवा, सीहोर, विदिशा, शाजापुर और राजगढ़ जिलों में सक्रिय रहा। पुलिस के अनुसार, वे भविष्य में रतलाम, नीमच, मंदसौर और राजस्थान के प्रतापगढ़ जैसे जिलों में भी अपने ठगी के नेटवर्क को फैलाने की तैयारी में थे।