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Agriculture News: सागर और बुंदेलखंड की मिट्टी में अब जिंक के साथ सल्फर की कमी भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे तिलहनी फसलों के उत्पादन और तेल प्रतिशत में कमी आती है. कृषि वैज्ञानिक किसानों को बुवाई के बाद सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और नियमित सल्फर उपयोग की सलाह दे रहे हैं. डीएपी के बदले सिंगल सुपर फॉस्फेट और जिंक-सल्फेट का उपयोग अधिक लाभदायक बताया गया है.
सागर. सागर सहित बुंदेलखंड की मिट्टी में अभी तक केवल जिंक की कमी पाई जाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से एकाएक सल्फर यानी कि गंधक की कमी भी देखी जा रही है. सल्फर की कमी होने की वजह से उत्पादन कम होने के साथ-साथ अनाज में तेल का परसेंटेज भी काम रहता है, जिसकी वजह से बेचते समय इसकी कीमत पर भी प्रभाव दिखाई देता है. इसलिए तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अब अलग-अलग समय पर सल्फर का उपयोग करने की सलाह कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा दी जा रही है.
सागर बुंदेलखंड में सरसों अलसी तिली सूरजमुखी की खेती की जाती है. ऐसे किसानों के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जैसे बुवाई के बाद दिन में कम से कम एक या दो बार सिंचाई स्प्रिंकलर से जरूर कर दें. 15 से 20 दिन की फसल होने के बाद खेत में अगर खरपतवार है, तो उसका इंतजाम करें इसके साथ ही अलग-अलग समय पर सल्फर या अन्य उर्वरकों का छिड़काव करना चाहिए.
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि हम लोगों के द्वारा लगातार मिट्टी का परीक्षण किया जा रहा है सागर संभाग में जिंक की कमी पाई गई है. लेकिन अब धीरे-धीरे सल्फर की कमी भी हो रही है. तो किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वर्तमान समय में अगर डीएपी खाद नहीं मिल रही है. वह डीएपी के पीछे ना भागे, उसकी जगह सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करें. इनमें सल्फर की मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा किसान भाइयों को 2 साल या 3 साल के अंतराल से 20 किलो या 25 किलो प्रति हेक्टर कि दर से बैंजो नाइट सल्फर है या जिंक सल्फेट इनका उपयोग करना चाहिए यह सल्फेट और जिंक दोनों की पूर्ति होती है.
सल्फर तिलहनी फसलों के लिए बहुत जरूरी है. यह जड़ों के विकास में काम करता है. अगर सल्फर की कमी हो जाए तो फसल में ऊपर की पत्तियां पीली पड़ने लगते हैं. जिसकी वजह से उपज में कमी आती है, इसी तरह यह प्रोटीन बढ़ने में काम करता है. सल्फर का उपयोग करने से तीन से पांच परसेंट तक तेल की वृद्धि हो जाती है. सल्फर सेकेंडरी एलिमेंट है. बहुत महत्वपूर्ण एलिमेंट है.
इसको मिलाने का तरीका यह है खेतों में कमी है तो मिट्टी परीक्षण करवा ले अंतिम जुताईके समय खेत में मिला करके खेत तैयार करके बुवाई करें, फिर भी कमी पाई जाती है. घुलनशील सल्फर का उपयोग करके ढाई ग्राम प्रति लीटर की दर से ऊपर से छिड़काव करें, उससे पाला भीई नहीं पड़ेगा, सल्फर की पूर्ति हो जाएगी रोग भी बहुत कम लगते हैं इन चीजों का उपयोग करके फसल की गुणवत्ता किस भाई बढ़ा सकते हैं.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें
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