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Burhanpur News: समाज के राजू सिंह राठौर ने कहा कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा गुरुद्वारा है. जहां पर पहले और दसवीं अंतिम गुरु आकर रुके हुए हैं. उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब लिखकर स्वर्णिम अक्षरों से हस्ताक्षर किया हुआ है.
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आज भी कई प्राचीन मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे मौजूद है. जिनकी अपनी-अपनी कहानी है. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लोधीपुरा क्षेत्र में बड़ा गुरुद्वारा है समाज से जुड़े राजविंदर सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि यह एक ऐसा गुरुद्वारा है. यहां पर पहले गुरु और अंतिम और दसवें गुरु गोविंद सिंह महाराज दोनों आए हुए हैं. जिन्होंने यहां पर गुरु ग्रंथ साहिब पर स्वर्णिम अक्षरों से हस्ताक्षर भी किए हुए हैं. इसको देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक भी इस गुरुद्वारे में पहुंचते हैं. इस गुरु द्वारा की एक और खासियत है कि यहां पर दरवाजे नहीं लगे हुए हैं
समाज जनों ने दी जानकारी
टीम ने समाज के राजू सिंह राठौर ने कहा कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा गुरुद्वारा है. जहां पर पहले और दसवीं अंतिम गुरु आकर रुके हुए हैं. उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब लिखकर उस पर स्वर्णिम अक्षरों से हस्ताक्षर किया हुआ है. इसलिए भी यह गुरुद्वारा खास है यहां पर देश-विदेश से भी सिख धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ अन्य धर्म के अनुयाई भी यहां पर पहुंचते हैं. इस गुरुद्वारे का इतिहास जानते हैं. यहां गुरुद्वारे की खासियत है कि यहां पर गुरुद्वारे में कहीं पर भी गेट नहीं लगा हुआ है. 24 घंटे गुरुद्वारा खुला रहता है..
24 घंटे चालू रहता है लंगर
इस गुरुद्वारे में 24 घंटे लंगर शुरू रहता है. जब भी यहां पर लोग गुरुद्वारे में माथा टेकने के लिए आते हैं तो उन्हें भोजन जरूर कराया जाता है. वह लंगर में भोजन करने के बाद ही आगे का सफर करते हैं कुछ लोगों के तो रुकने की भी यहां पर व्यवस्था प्रबंधन समिति की ओर से की गई है जो लोग यहां पर रुख कर गुरबाणी और शबद कीर्तन में शामिल होकर ही आगे का सफर तय करते हैं. पंजाब से आने वाले अनुयाई भी यहां पर रुक कर ही आगे की यात्रा पूरी करते हैं.