कसरावद विधायक और कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री सचिन यादव ने मध्य प्रदेश के विधानसभा सत्र को छोटा करने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कसरावद में कहा कि विधानसभा सत्र को छोटा करना सरकार की सोची-समझी रणनीति है, ताकि जनता के ज्वलंत मुद्दों पर खुली बहस से बच
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यादव के अनुसार, सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह छोटा सत्र स्वीकार्य नहीं होगा और सरकार को हर हाल में जवाब देना ही पड़ेगा।
सत्र के दिन कम करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने जैसा विधायक यादव ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि तब विधानसभा सत्र महीनों तक चलते थे, जहां जनता से जुड़े हर मुद्दे पर खुली और गहन चर्चा होती थी। उन्होंने मौजूदा सत्र की अवधि में लगातार कमी को लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का संकेत बताया।
जनता के मुद्दों पर बहस से बचने के की रणनीति
उन्होंने विभिन्न समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज किसानों की परेशानियां चरम पर हैं। किसानों को यूरिया के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, सोयाबीन और मक्का की एमएसपी पर खरीदी नहीं हो रही है, तथा धान और कपास के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इसके साथ ही, कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है और स्वास्थ्य सेवाएं ‘वेंटिलेटर’ पर हैं। इन मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा से बचना लोकतंत्र का अपमान और जनता के साथ अन्याय है।
यादव ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाना चाहती है। उन्होंने कहा कि वे जनता के सवालों से सरकार को भागने नहीं देंगे और किसान, नौजवान, महिला तथा व्यापारी सहित हर वर्ग की आवाज विधानसभा में गूंजेगी।