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Agriculture News: किसान दिसंबर के महीने में चने की फसल की बुवाई करना चाहते हैं तो JG 16 किस्म आपके लिए बेहतर हो सकती है जो कि कम दिनों में अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखता है. इसके अलावा JG 130, पूसा 544, पूसा 572, पूसा 362, पूसा 372, पूसा 547 जैसी पछेती किस्म की भी बुवाई के लिए अच्छा माना जाता है
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में चने की फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए समय पर बुवाई करना बेहद जरूरी है. चने की बुवाई के लिए सबसे बेस्ट समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 25 नवंबर तक माना जाता है. लेकिन अगर किसान किसी वजह से इस समय के दौरान चने की फसल की बुवाई नहीं कर पाए हैं.अब किस्म का चुनाव करते समय ध्यान रखें, बहुत सी ऐसी किस्में हैं.जिनकी 10 दिसंबर के बाद बुवाई करने पर भी किसान पूरा उत्पादन ले सकते है. हालांकि, बुवाई करते समय किसानों को खेत की तैयारी अच्छी तरह से करनी चाहिए.
किसान राजेश पटेल लोकल 18 से कहा कि 25 नवंबर तक अगर किसान चने की फसल की बुवाई करते हैं तो कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सकता है. लेकिन कई बार किसान धान की फसल की कटाई के बाद चने की बुवाई करते हैं या फिर किसी अन्य कारण की वजह से चने की बुवाई देरी से कर रहे हैं. वह कृषि विश्वविद्यालय या फिर अनुसंधान केंद्रों द्वारा संस्तुत किस्म का चयन करें. चने की कई ऐसी किस्म विकसित की गई हैं. जिनको दिसंबर महीने में बुवाई कर भी किसान अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.
पछेती चने की टॉप किस्में
अगर आप दिसंबर के महीने में चने की फसल की बुवाई करना चाहते हैं तो JG 16 किस्म आपके लिए बेहतर हो सकती है जो कि कम दिनों में अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखता है. इसके अलावा JG 130, पूसा 544, पूसा 572, पूसा 362, पूसा 372, पूसा 547 जैसी पछेती किस्म की भी बुवाई दिसंबर के महीने में की जा सकती है. चने की पहली सिंचाई बुवाई के 35-40 दिन बाद की जानी चाहिए. इसके बाद, दूसरी सिंचाई फूल आने से पहले या दाने भरने की अवस्था में करें। इस दौरान ध्यान रखें कि फूल आने की अवस्था में सिंचाई न करें.