नई दिल्ली. ये कहानी है ऐसे खिलाड़ी की, जिसकी मौजूदगी ही विरोधी टीम में हलचल मचा देती थी.जब वह गेंद लेकर दौड़ता था, तो बल्लेबाज़ों के दिल की धड़कन तेज़,और जब वह बैट उठाता था तो गेंदबाज़ों की सांसे अटक जाती थीं. यह वही तूफ़ानी ऑलराउंडर है जिसे इंग्लैंड क्रिकेट का गर्व कहा गया, जिसे ऐशेज का हीरो माना गया और जो एक दिन अचानक चमकती लाइटों, गूंजते चैंट्स और धमाकेदार एंट्री वाली दुनिया WWE की ओर बढ़ चला.
एंड्रयू “फ्रेडी” फ्लिंटॉफ, वह नाम जिसने क्रिकेट और एंटरटेनमेंट दोनों को हिला कर रख दिया. और उस से भी ज्यादा चर्चा में रही उनकी आगभरी टक्कर टीम इंडिया के “दादा” सौरव गांगुली से. कभी मैदान पर तूफ़ानी जश्न, कभी एक-दूसरे को घूरकर दिए गए जवाब फ्लिंटॉफ और गांगुली की लड़ाई इतनी मशहूर रही कि आज भी क्रिकेट फैंस उसे मसाले में नमक की तरह याद करते हैं. और फिर WWE की लाखोंकरोड़ों की डील, जिसने सबको हैरान कर दिया. यानी मैदान से रिंग तक, बल्ले से बॉडीस्लैम तक,फ्लिंटॉफ की कहानी खुद एक ब्लॉकबस्टर है.
मैदान से मैट पर पहुंचा महारथी
वर्ल्ड कप 2007 में युवराज सिंह से भिड़ने के लिए मशहूर इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने बहुत बड़ा खुलासा किया था कि उन्हें क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद वर्ल्ड रेसिलंग एंटरटेनमेंट (WWE) से बहुत बड़ा ऑफर मिला था. WWE की तरफ से फ्लिंटॉफ को रॉयल रंबल और रेसलमेनिया (WrestleMania) जैसे बड़े इवेंट्स में लड़ने का ऑफर मिला था. फ्लिंटॉफ WWE में द अंडरटेकर के साथ फाइट के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बहुत करीब आ गए थे. फ्लिंटॉफ ने WWE के टैम्पा स्थित परफॉर्मेंस सेंटर में ट्रेनिंग भी की थी. फ्लिंटॉफ ने जब साल 2010 में क्रिकेट से रिटायरमेंट लिया, तब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें. इस दौरान उनके पास WWE से ऑफर आया था.
बच्चों ने बचा लिया !
फ्लिंटॉफ ने एक पॉडकास्ट के दौरान बताया था कि वो कुछ समय के लिए छुप गए थे और सोच रहे थे कि अब क्या करुंगा, कुछ टीवी से ऑफर आए. लेकिन वो कभी प्लान नहीं था. मैंने लगभग WWE ज्वाइन कर लिया था. फ्लिंटॉफ ने आगे बताया कि WWE ने उन्हें WWE एकेडमी में भेजा. फ्लिंटॉफ ने वहां दो हफ्ते तक ट्रेनिंग की. इसके बाद WWE की तरफ से उन्हें तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट के लिए मेल आया. WWE की तरफ से उन्हें रॉयल रंबल और रेसलमेनिया में लड़ने का ऑफर भी मिला. लेकिन उन्हें ये ऑफर ठुकराना पड़ा, क्योंकि उनके बच्चे अमेरिका नहीं जाना चाहते थे. वो क्रिकेट खेलना चाहते थे. फ्लिंटॉफ ने सटीक रकम नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि कई करोड़ उनको मिलने वाले थे.
एंड्रयू फ्लिंटॉफ का करियर
फ्लिंटॉफ ऐसे खिलाड़ी थे, जिनके दिन हों तो अकेले मैच पलट देते थे. उन्होंने अपने करियर में कई बार इंग्लैंड को मुश्किल समय से उठाकर जीत दिलाई, लेकिन उनका सबसे चमकदार अध्याय था ऐशेज 2005.
यह वही सीरीज़ थी जिसने फ्लिंटॉफ को इंग्लैंड का सुपरहीरो बना दिया।उनकी आग बरसाती गेंदबाज़ी और धमाकेदार बैटिंग ने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को झुकने पर मजबूर कर दिया. एंड्रयू फ्लिंटॉफ का क्रिकेट करियर बहुत शानदार रहा, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड के लिए 227 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले और 7315 रन बनाए, साथ ही 400 विकेट लिए। वह 2005 एशेज श्रृंखला जीतने में इंग्लैंड की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाने जाते हैं। चोट के कारण 2009 में उनके करियर का अंत हो गया, लेकिन वह अपने करियर में एक रोमांचक और प्रभावी ऑलराउंडर के रूप में याद किए जाते हैं। उन्होंने 1995 में लंकाशायर के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और 1998 में टेस्ट मैच में पदार्पण किया. फ्लिंटॉफ ने टेस्ट क्रिकेट में 3845 रन बनाए और 226 विकेट लिए, जबकि एकदिवसीय मैचों में 7315 रन बनाए और 168 विकेट लिए.