सांस फूलना, बेचैनी… ठंड में होने लगीं ये तकलीफें, कहीं बढ़ ना जाए हार्टअटैक का खतरा! जानें सेफ्टी टिप्स

सांस फूलना, बेचैनी… ठंड में होने लगीं ये तकलीफें, कहीं बढ़ ना जाए हार्टअटैक का खतरा! जानें सेफ्टी टिप्स


How to Keep Heart Healthy in Winter: सर्दियां दस्तक दे चुकी हैं और खंडवा शहर का मौसम अचानक करवट ले चुका है. इस बार दिसंबर नहीं, बल्कि नवंबर से ही ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. तापमान जहां पहले 12–14 डिग्री तक रहता था, वहीं इस बार शुरुआती दिनों में ही 7 डिग्री तक पहुंच गया है. तापमान की यह तेज गिरावट सीधे लोगों की सेहत पर असर डाल रही है, खासकर दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर.

सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है जो सीने में दर्द, सांस फूलना, कमजोरी या घबराहट जैसी तकलीफ लेकर पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में हार्ट अटैक के मामले प्राकृतिक रूप से बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड का असर सीधे हमारे दिल और खून के प्रवाह पर पड़ता है. क्या वजह है इसके पीछे? और कैसे खुद को सुरक्षित रखें? आइए जानें एक्सपर्ट की राय…

सर्दी का दिल पर असर
हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर पंकज जैन बताते हैं कि गर्मियों की तुलना में सर्दियों में दिल से जुड़े मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है. इस इसकी कई वजह है, जैसे… तापमान गिरने पर शरीर की रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं.
खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो धीमा पड़ता है. दिल को रक्त पंप करने में ज्यादा दबाव देना पड़ता है. इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

डॉ. जैन के अनुसार, सर्दी और फ्लू के मौसम में खांसी-जुकाम, बुखार, गले में खराश जैसी परेशानियां आम हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है, उनके लिए ये लक्षण गंभीर रूप ले सकते हैं. ब्रोंकाइटिस और चेस्ट पेन दिल के मरीजों के लिए खतरा बढ़ाता है. डॉक्टर बताते हैं कि ठंड में ब्रोंकाइटिस के मामले बढ़ते हैं. ब्रोंकाइटिस में सीने में जलन या दर्द, सांस लेने में समस्या, खांसी बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो दिल के मरीजों में स्थिति को और खराब कर सकते हैं. यदि किसी को पहले से कार्डियक समस्या है, तो सर्दियों में ब्रोंकाइटिस उनके लिए दोहरी परेशानी बन सकता है.

हार्ट और दिमाग पर सीधा हमला
आम भाषा में लोग कहते हैं कि सर्दी में खून गाढ़ा हो जाता है. डॉक्टर जैन भी मानते हैं कि इसमें कुछ सत्यता है. खून का गाढ़ापन बढ़ने पर हार्ट तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता. हार्ट में क्लॉट (थक्का) बनने की संभावना बढ़ती है. वहीं क्लॉट दिमाग में जाकर स्ट्रोक यानी लकवा भी कर सकता है. यही कारण है कि सर्दियों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक दोनों के मामले बढ़ जाते हैं.

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि आपको या किसी परिवार के सदस्य को यह लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

1. सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
2. घबराहट या बेचैनी
3. एक हाथ या पैर में सुन्नता
4. चेहरे का एक हिस्सा कमजोर पड़ना
5. शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक कमजोरी
6. सांस फूलना
7. अत्यधिक ठंड लगना और पसीना आना, ये हार्ट अटैक या स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.

इन बातों का ध्यान रखें
डॉ. पंकज जैन के अनुसार, दिल को स्वस्थ रखने के लिए सर्दियों में कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं.
1. सुबह जल्दी बाहर न निकलें– सुबह तापमान सबसे कम होता है. इस समय दिल पर सबसे ज्यादा प्रेशर पड़ता है. हार्ट मरीज सुबह 6–9 बजे बाहर न निकलें.
2. पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें– स्वेटर, टोपी, मफलर और मोज़े जरूर पहनें ताकि शरीर का तापमान स्थिर रहे.
3. मास्क पहनकर रहें- मास्क ठंडी हवा से फेफड़ों की सुरक्षा करता है और वायरल संक्रमण से बचाता है.
4. बहुत ठंडा पानी न पिएं- ठंडा पानी शरीर की नलिकाएं सिकोड़ देता है, जिससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.
5. हल्का व्यायाम करें- तेज दौड़ना या वर्कआउट दिल पर दबाव डाल सकता है. हल्की वॉक बेहतर है.
6. खानपान संतुलित रखें- गर्म सूप, मौसमी फल, ओट्स, सूखे मेवे, और हरी सब्जियाँ खाएं.
तला-भुना, ज्यादा नमक और ज्यादा चीनी से बचें.
7. अपनी दवाइयां नियमित लें- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं न छोड़ें और समय पर चेकअप कराते रहें.



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