भोपाल की कलियासोत नदी को साबरमती की तर्ज पर मिलेगा नया रूप

भोपाल की कलियासोत नदी को साबरमती की तर्ज पर मिलेगा नया रूप


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित कलियासोत नदी को गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर डेवलप किया जाना है. इसके लिए नगर निगम ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं. 31 करोड़ का यह प्रोजेक्ट दो साल में पूरा किया जाएगा. हालांकि यह प्रोजेक्ट किसी चुनौती से कम नहीं होगा. नदी के बफर जोन में 33 मीटर दायरे से जहां 100 से ज्यादा पक्के अवैध निर्माणों को हटाया जाना है. 700 से ज्यादा अवैध कब्जे 36 किमी लंबी इस नदी के किनारों पर पसरे हैं, उन्हें भी हटाया जाना है.

करीब चार महीने पहले महापौर परिषद ने अमृत 2.0 के तहत 36.68 करोड़ रुपए लागत वाले कलियासोत रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के टेंडर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. ऐसे में करीब 31 करोड़ के आसपास का टेंडर भी जारी किया गया. वहीं 36 किमी लंबी नदी के किनारे 8,000 एकड़ के करीब निजी जमीन है. शहर में इसका बहाव भोजपुर से मिसरोद तक 17 किमी है.

23 किमी तक किया जाएगा रिवर फ्रंट डेवलप
शहर के अंदर कलियासोत नदी पर भदभदा, चंदनपुरा से लेकर समरधा मंडीदीप ब्रिज तक 23 किमी का रिवर फ्रंट डेवलप किया जाएगा. इसे गुजरात की साबरमती की तर्ज पर विकसित करने की योजना है. रिवर फ्रंट बनने के बाद कलियासोत वन क्षेत्र के विभिन्न जलस्रोतों से मिलकर बनी 36 किमी लंबाई वाली नदी पूरे साल बहती दिखेगी.

यहां बनेगा स्टॉप डैम
कलियासोत नदी पर मौजूदा ब्रिज के पास स्टॉप डैम बनाए जाएंगे. जल संसाधन विभाग द्वारा सर्वधर्म पुल, जेके अस्पताल पुल और दानिश कुंज ब्रिज के पास स्टॉप डैम बनाने की तैयारी है. इसके अलावा सलैया ब्रिज से आगे भी एक स्टॉप डैम बनाने का प्रस्ताव है. तीनों स्टॉप डैम बनने से 30 लाख घनमीटर तक पानी जमा होगा. डैम से 8 किमी तक नदी में पूरे साल पानी भरा रहेगा.

आठ किलोमीटर में तीन स्टॉप डैम
स्टॉप डैम-1 सर्वधर्म के मौजूदा पुल के पास बनेगा, जो कि 2.5 किमी की दूरी पर है. वहीं स्टॉप डैम 2 जैके हॉस्पिटल और दानिश ब्रिज के बीच बनेगा, जो कि किमी की दूरी पर है. स्टॉप डैम-3 सलैया ब्रिज से आगे की ओर बनेगा, जिसमें मौजूदा सलैया ब्रिज डूब सकता है. ऐसे में यहां दूसरा ब्रिज बनाना होगा.

नदी में पहुंच रहा गंदा पानी
वर्तमान में शाहपुरा के पास कोलार रोड से कलियासोत नदी में टीटी नगर, मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली और चूनाभट्टी के नालों से घरेलू कचरा मिल रहा है. वहीं मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले से और दक्षिण पूर्वी भाग की बस्तियों से होकर नदी में सीवेज और गंदा पानी सीधे कलियासोत नदी में ही मिल रहा है. औद्योगिक क्षेत्र का कचरा मिलने से भी नदी दूषित हो रही है. मिसरोद व इससे जुड़ी आबादी का सीवेज नदी को गंदा कर रहा है.

नदी के आसपास बड़ी संख्या में निर्माण
नदी के अंदर व बफर में करीब 1100 निर्माण हैं. स्टॉप डैम बनने से 30 लाख घनमीटर पानी जमा होगा, तो ये निर्माण भी जलभराव क्षेत्र की जद में आएंगे. इन्हें हटाना बेहद जरूरी है. बारिश के मौसम को छोड़ दिया जाए तो नदी 8 से 9 माह सूखी रहती है. साथ ही यहां कोई घाट भी नहीं है. नदी भोजपुर के पास बेतवा में मिलती है. बरसात के दिनों में नदी में पानी रहता है, लेकिन गर्मी आते ही नदी सूख जाती है.



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