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Tamatar ki Kheti: कृषि किसान क्लीनिक के विशेषज्ञ सुनील पटेल बताते हैं कि टमाटर ऐसी फसल है जो सही मैनेजमेंट के साथ केवल 50–55 दिनों में तगड़ा उत्पादन दे देती है. टमाटर हल्की जमीन में उतना अच्छा नहीं बैठता, लेकिन मध्यम और उपजाऊ जमीन हो तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फल भी ज्यादा आते हैं.
दिसंबर का महीना किसानों के लिए एक नए कृषि चक्र की तरह होता है. रबी सीजन की बुआई ज़ोरों पर रहती है और किसान ऐसी फसलें तलाशते हैं जिनमें मेहनत कम लगे समय छोटा हो और कमाई तगड़ी हो. ऐसी ही एक फसल टमाटर है.टमाटर को अक्सर क्रैश क्रॉप कहा जाता है. क्योंकि यह कम समय में ज्यादा उत्पादन और अच्छा बाजार भाव देकर किसान की जेब भर देती है. आज हम आसान और प्रैक्टिकल भाषा में समझेंगे कि दिसंबर में टमाटर की खेती कैसे करें.
कम दिनों में ज्यादा उत्पादन
जय कृषि किसान क्लीनिक के विशेषज्ञ सुनील पटेल बताते हैं कि टमाटर ऐसी फसल है जो सही मैनेजमेंट के साथ केवल 50–55 दिनों में तगड़ा उत्पादन दे देती है. टमाटर हल्की जमीन में उतना अच्छा नहीं बैठता, लेकिन मध्यम और उपजाऊ जमीन हो तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फल भी ज्यादा आते हैं.
कभी घाटा नहीं होगा
यह पूरी तरह कैश क्रॉप है. सीजन भी सही है. इस समय बाजार में टमाटर के दाम बेहद अच्छे मिल रहे हैं. किसान अगर सही तरीके से खेत तैयार कर ले और मैनेजमेंट ठीक रखे तो यह फसल कभी घाटा नहीं देती है
उत्पादन बढ़ाने का सबसे आसान तरीका
1. खरपतवार नहीं उगते, जिससे मजदूरी का खर्च कम होता है.
2. पौधों को नियमित नमी मिलती रहती है, जिससे पौधा स्ट्रेस में नहीं जाता है.
3. मल्चिंग से मिट्टी का तापमान स्थिर रहता है, इसलिए ठंड में भी फसल मजबूत रहती है.
4. पानी की खपत 40–50% तक कम हो जाती है.
5. उत्पादन पहले से 20–30% तक बढ़ जाता है.
बाजार में मिल रहा शानदार भाव
अच्छी क्वालिटी का टमाटर बाजार में 50–60 रुपये किलो तक बिकता है.यह भाव किसानों के लिए किसी बोनस से कम नहीं है.यदि किसान दिसंबर में पौध लगा दें तो जनवरी-फरवरी में जब ठंड बढ़ती है, उस समय बाजार में मांग ज्यादा और सप्लाई कम होती है.