दतिया जिले में प्रशासन ने 16 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाया। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से सूचना मिलने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने टीम भेजी। परिजनों के असहयोग के बावजूद आंगनवाड़ी रिकॉर्ड से बालिका की उम्र 16 वर्ष प्रमाणित हुई। कानूनी नोटिस जारी करने
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यह कार्रवाई कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े के निर्देशन और जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई। प्रशासन को 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन से ग्राम कमलपुरी में एक नाबालिग बालिका के विवाह की सूचना मिली थी। इस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी ने तत्काल बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (भांडेर) नीलम मौर्य को थाना गोदन की पुलिस टीम के साथ मौके पर भेजा।
मौके पर पहुंची टीम को परिजनों के असहयोग का सामना करना पड़ा। परिजनों ने लगभग चार घंटे तक बालिका की उम्र से संबंधित दस्तावेज देने से इनकार किया और शादी के माहौल का बहाना बनाकर टीम को गुमराह करने का प्रयास किया। इसके बावजूद, परियोजना अधिकारी नीलम मौर्य ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पुराने रिकॉर्ड खंगालने के निर्देश दिए। वर्ष 2009 के रिकॉर्ड में बालिका का नाम दर्ज मिला, जिससे उसकी उम्र 16 वर्ष प्रमाणित हुई। आधिकारिक प्रमाण मिलते ही टीम ने विवाह रुकवाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
नीलम मौर्य ने बालिका के पिता और विवाह में शामिल अन्य परिजनों को कानूनी नोटिस जारी किया। जब परिजनों ने नोटिस लेने से इनकार किया, तो अधिनियम के प्रावधानों के तहत नोटिस घर के मुख्य द्वार पर चस्पा कर दिया गया। प्रशासन की इस सख्ती के बाद दूल्हे पक्ष की बारात बिना शादी के ही लौट गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय ने इस अवसर पर कहा कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है और इसे जिले में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और तत्परता को दर्शाती है।