इंदौर का स्वाद, सराफा की जंबो जलेबी! स्वाद ऐसा कि खाते-खाते थक जाओ, लेकिन स्वाद कभी कम न हो

इंदौर का स्वाद, सराफा की जंबो जलेबी! स्वाद ऐसा कि खाते-खाते थक जाओ, लेकिन स्वाद कभी कम न हो


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Indore News: इंदौर सराफा चौपाटी की जंबो जलेबी यहां की खास पहचान बन चुकी है. करीब 55 साल पहले राम गुप्ता के पिता ने इसकी शुरुआत की थी. लगभग 1 किलो की यह मोटी, कड़क और रस से भरी जलेबी सामान्य जलेबी से ज्यादा स्वादिष्ट मानी जाती है.

इंदौर. इंदौर खान-पान और स्वाद के शौकीनों का शहर तो है, लेकिन आपने हमेशा इसका नाम नमकीन के साथ ज्यादा जुड़ा हुआ देखा होगा.‌ यहां की सराफा चार चौपाटी विश्व प्रसिद्ध है और इसी चौपाटी में मिलती है. जंबो जलेबी जिसे एक व्यक्ति द्वारा खा पाना नामुमकिन है. यह एक जलेबी अपने आप में 1 किलो की होती है.

सराफा चौपाटी संगठन के अध्यक्ष और जंबो जलेबी बनाने वाले राम गुप्ता ने हमें बताया कि उनके पिताजी ने इसकी शुरुआत करी 55 साल पहले की थी. इसका उद्देश्य था लोगों को चासनी का भरपूर स्वाद और आनंद मिले. दरअसल छोटी और पतली जलेबी मैं पल्प नहीं होता, जिसे चाहती उसमें टिक नहीं पाती, जबकि बड़ी जलेबी थोड़ी मोटी होती है और उसे कड़क बनाया जाता है, जिसे कहते ही या मुंह में घुल जाती है और जलेबी का पल्प और चासनी मिलकर एक अलग ही स्वाद उत्पन्न करते हैं.

वैसे तो सबसे बड़ी जलेबी का वजन करीब 1 किलो होता है, लेकिन इसे आधा किलो और 250 ग्राम में भी मनाया जाता है.‌ आप इस पूरी जम्बो जलेबी या जलेबा को नहीं खा सकते लेकिन इसका भाग कर इसके छोटे अंश भी ले सकते हैं. सामान्य तौर पर यह आपको एक प्लेट में तीन जलेबी और उसे पर ढेर सारी रबड़ी डाल कर दी जाती है जो करीब 150 प्रति प्लेट के हिसाब से मिलती है.

जलेबी में डाले जाने वाली केसर और इलायची इसकी चासनी को खास बनाती है. इस बड़े जलेबी को बनाने का खास उद्देश्य भी यही है कि पतली जलेबी में उसके केसर इलायची का वह स्वाद नहीं उतर पाता, जीतनी बड़ी जलेबी में उतरता है. वैसे तो यह जम्मू जलेबी आपको साल भारी सराफा में मिलती है, लेकिन जैसे सराफा की खासियत है. इसकी रौनक रात में ही बनती है और ठंड के दिनों में जलेबी रबड़ी की जुगलबंदी इसके आनंद में चार चांद लगा देती है.

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Anuj Singh

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