दिनभर उड़ती रहती है धूल रात में स्ट्रीट लाइट बंद, कैसे निकालें वाहन
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बायपास पर सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। तीन महीने में राऊ सर्कल से शिप्रा तक 58 किमी में बायपास पर 100 से ज्यादा हादसे हुए। इसमें मरने वालों की संख्या 15 के करीब है। मांगलिया से लेकर शिप्रा तक 20 किमी में सड़क की हालत जर्जर हो चुकी है।
1 सितंबर से 25 नवंबर तक मांगलिया से शिप्रा तक के सफर में 35 एक्सीडेंट हुए। इनमें 5 लोगों ने जान गंवाई, जबकि 10 से ज्यादा लोगों को फ्रैक्चर हुए। हादसों का मुख्य कारण गड्ढेदार ऊबड़खाबड़ खराब सड़क है। दिन में बायपास पर धूल का गुबार दिखाई देता है। रात में अंधेरा पसरा रहता है। राहगीर ही नहीं, यहां रहने वाले ग्रामवासी भी खराब सड़क का खामियाजा भुगत रहे हैं। जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
केस-1 : बाइक का संतुलन बिगड़ा, गिरने से महिला की मौत
25 सितंबर को शिप्रा में एक वृद्धा कमला बाई पांचाल (75) निवासी बिचौली मर्दाना की मौत हो गई। वे पड़ोसी के साथ दर्शन करने देवास टेकरी जा रही थीं। डकाच्या के पास गड्ढे के कारण बाइक का संतुलन बिगड़ा और वृद्धा गिर गईं। उनके सिर में गंभीर चोट लगी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
केस -2 : जैसे ही गाड़ी धीमी की, पीछे से ट्रक ने मार दी थी टक्कर
7 सितंबर को हुए हादसे में राकेश पाटीदार (35) की मौत हो गई। घटना सोनी पेट्रोल पंप के पास अर्जुन बड़ौदा बायपास पर हुई। खराब सड़क के राकेश ने गाड़ी धीमी की, तभी पीछे आ रहे ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।
केस-3 : ट्रक ने पीछे से मारी टक्कर, युवक की मौत
6 नवंबर को सुभाष (21) पिता अमर सिंह मेड़ा की हादसे में मौत हो गई। उनका साथी प्रवीण तोमर (18) गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों साथी घर लौट रहे थे। गड्ढे से बचने के लिए उन्होंने बाइक धीमी की। पीछे आ रहे ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी थी।
दो महीने में 533 हादसे, 27 की मौत
सितंबर-अक्टूबर में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 533 सड़क हादसे हुए। इस दौरान 27 लोगों की मौत हुई है। बायपास से लगे तेजाजी नगर क्षेत्र में 27 एक्सीडेंट में 3 मौत हुई। वहीं, राऊ में 17 एक्सीडेंट में 1 मौत, कनाड़िया में 14 एक्सीडेंट में दो मौत, लसूड़िया में 30 एक्सीडेंट में दो मौत हुई।
पैचवर्क के नाम पर पेवर ब्लॉक गड्ढों में डाले
ग्रामीण सुनील पटेल ने बताया, जाम की समस्या दूर करने के लिए एनएचएआई ने अर्जुन बड़ौद सड़क पर पैचवर्क किया था। पैचवर्क के नाम पर गड्ढों में पेवर ब्लॉक डाले थे। ऊपर से मिट्टी और मुरम डाल दी थी। मिट्टी-मुरम तो धूल का गुबार बनकर उड़ रही है, गड्ढों में पड़े पेवर ब्लॉक के कारण वाहन निकालने में समस्या आ रही है। धूल इतनी उड़ती है कि कुछ दिखाई नहीं देता। बायपास पर स्ट्रीट लाइट हमेशा बंद मिलती है।
पैचवर्क किया जा रहा है
– प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई