सागर| वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पुराना नौरादेही अभयारण्य) में बाघ गणना चल रही है। सबसे पहले 18 अप्रैल 2018 को कान्हा नेशनल पार्क से बाघिन नौरादेही लाई गई। इसे ऑफिशियली नामकरण हुआ एन-1 और स्थानीय लोगों ने इसे राधा नाम दिया। राधा के जीवन संघर्ष
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राधा व एक अन्य शावक जीवित बच गया। दोनों का रेस्क्यू कर कान्हा टाइगर रिजर्व भेजा गया। दो दिन बाद एक और शावक ने दम तोड़ दिया। अकेली राधा जीवित बची उसे जंगल में अनुकूल माहौल में रखकर बचा लिया गया। राधा की नौरादेही में शिफ्टिंग के ठीक दो महीने बाद बांधवगढ़ से बाघ लाया गया। नामकरण हुआ एन-2 और किशन।
मई 2019 में राधा ने पहली बार तीन शावकों को जन्म दिया। इनमें दो बाघिन व एक बाघ हैं। राधा से पहली बार में जन्मी उसकी दो बेटी एन-111 और एन 112 मां बनीं तो राधा ने तीसरी पीढ़ी देख ली। जून 2023 में बाघ किशन की और बाहर से आए बाघ एन-3 के बीच टेरिटरी को लेकर हुए संघर्ष में मौत हो गई। किशन और राधा की बेटियां टाइगर रिजर्व को बाघों से आबाद कर रही हैं। वर्तमान में टाइगर रिजर्व में 26 बाघ होने का दावा किया जा रहा है। इसमें 22 बाघ-बाघिन राधा और उसकी दो बेटियों से जन्में हैं।