एक मेडिकल इंस्टीट्यूट… और उसके बीचों-बीच शाम को हवा में घुली हल्की ठंडक, चमकती लाइटें, स्टेज पर उठता धुआं, और भीड़ में खड़े हजारों युवा, यह नजारा किसी म्यूजिक फेस्ट का नहीं, बल्कि एम्स भोपाल के वार्षिक उत्सव RETINA 8.0 का था। पढ़ाई, प्रैक्टिकल, इंट
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जैसे ही इंडी सिंगर आदित्य रिखारी ने स्टेज पर “ओ मेरे हमदम, हमदम…” गाकर एंट्री ली, पूरा कैंपस चीखों, तालियों और फ्लैश लाइट्स की चमक से जगमगा उठा।
आदित्य रिखारी ने स्टेज पर “ओ मेरे हमदम, हमदम…” गाकर एंट्री ली।
“साहिबा…” ने बनाया जादू, भीड़ गुनगुनाती रही कॉन्सर्ट की शुरुआत ही इतनी खूबसूरत थी कि एक सेकेंड के लिए भी स्टूडेंट्स ने पलकें नहीं झपकाईं। जब उन्होंने “साहिबा… आए घर काहे ना? ऐसे तो सताए ना…” गाया, पूरा ग्राउंड एक साथ गूंज उठा। मेडिकल स्टूडेंट्स ने बताया कि ऐसा लगा जैसे यह गाना खास उन्हीं के लिए बना हो। लंबी रातों की पढ़ाई, थकान, अनसुलझे असाइनमेंट और क्रश की यादें, सब एक सुर में बह गईं।
रिखारी ने स्टेज पर एक के बाद एक गीतों से माहौल को और भी सोल फुल बना दिया। इसमें नासमझ हूं समझता नहीं, आज मोहब्बत करते हैं तुझे, माना तेरी मुस्कुराहट समेत कई अन्य गाने शामिल रहे।
आदित्य ने स्टेज से कहा, यह गाना उनके लिए, जिन्हें रात में नींद नहीं आती हैं। फिर गाया रात-रात भर जागी रे… तो स्टूडेंट्स की हंसी और शोर से पूरा कैंपस झूम उठा। कई छात्रों ने बाद में बताया कि यह लाइन सुनकर उन्हें अपनी पढ़ाई वाली रातें याद आ गईं।

आदित्य ने “साहिबा… आए घर काहे ना?” गाया, पूरा ग्राउंड एक साथ गूंज उठा।
एक हजार से ज्यादा की भीड़ आयोजन समिति के अनुसार गुरुवार शाम करीब 1,000 लोग मैदान में मौजूद थे। भीड़ में एमबीबीएस के विद्यार्थी थे, नर्सिंग के स्टूडेंट्स, कई फैकल्टी मेंबर और सबसे खास आदित्य के छोटे-छोटे फैंस, जो सिर्फ “साहिबा” सुनने आए थे।

गुंजन ने कहा कि सबसे खूबसूरत पल था, जब उन्होंने ‘हमदम’ पर एंट्री की।
एक अन्य दर्शक ने कहा कि मैं खास ‘पारो’ और ‘साहिबा’ के लिए आई थी। लाइव सुनकर दिल खुश हो गया। मैं महीनों से इस कॉन्सर्ट का इंतजार कर रही थी।
स्टूडेंट्स की वाइब्स भी दिखीं RETINA सिर्फ कॉन्सर्ट नहीं है, यह मेडिकल छात्रों की क्रिएटिविटी का फेस्ट है। उसी शाम दिनभर स्टूडेंट्स कई प्रतियोगिताओं में उतरे थे। जिसमें डुएट डांस, पेबल पेंटिंग, मोनो एक्ट, स्केचिंग, टी-शर्ट पेंटिंग, शायरी, सोलो डांस, क्विज और लेमन रेस शामिल थे। हर कोने में कुछ न कुछ नया हो रहा था। कहीं रंग बन रहे थे, कहीं ताल पर कदम मिल रहे थे, कहीं कैमरे फ्लैश हो रहे थे। मेडिकल स्टूडेंट्स ने बताया कि RETINA उनके लिए सिर्फ फेस्ट नहीं “थेरेपी” है।
क्यों खास है RETINA 8.0? इस साल का RETINA 8.0 पहले से कहीं बड़ा, भव्य और भावनाओं से भरा हुआ है। 3 दिसंबर से शुरू हुए इस फेस्ट ने एम्स कैंपस को एक रंगीन शहर में बदल दिया है। इस बार की थीम “Where medicine meets music, art and unforgettable experiences” बिल्कुल सही साबित हो रही है। हर शाम एक नया रंग, एक नई कहानी और नए एहसास लेकर आ रही है।