Last Updated:
भोपाल और आसपास में एक साल में कई पुराने पुल जैसे बैरसिया-नरसिंहगढ़, नयागांव ढह गए. मरम्मत की कमी और चेतावनी बोर्ड न होने से हादसे बढ़े. लोक निर्माण विभाग ने सुधार कार्य शुरू किए.
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आसपास बीते कुछ माह के अंदर कई पुल भरभरा कर गिर चुके हैं. इसमें भोपाल बायपास से लेकर बैरसिया-नरसिंहगढ़ पुल और अब पिपरिया-बरेली स्टेट हाईवे पर सोमवार सुबह नयागांव पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया. ऐसे में प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों के पीछे कई सारी वजह बताई जा रही है.
एक साल के भीतर ही कई नए-पुराने निर्माण ढह चुके
भोपाल व उसके आसपास पिछले एक साल के भीतर ही कई नए-पुराने निर्माण ढह चुके हैं. इसमें सबसे पहले साल की शुरुआत में ही 16 जनवरी को आधी रात भोपाल के बैरसिया-नरसिंहगढ़ रोड पर स्थित पार्वती नदी पर बना पुल क्रैक होकर धंस गया. इसके बाद पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई. बताया गया कि ये पुल करीब 49 साल पुराना है. इसमें मरम्मत की कमी की बात सामने आई है. इसके बाद 14 अक्टूबर को भोपाल ईस्टर्न बाईपास पर बिलखिरिया गांव के पास की यह सड़क धंस जाती है. बता दें, यह सड़क इंदौर, होशंगाबाद, जबलपुर, जयपुर, मंडला और सागर जैसे प्रमुख मार्गों को आपस में जोड़ती है.
अब वर्तमान समय की बात करें तो 1 दिसंबर को रायसेन जिले के अंतर्गत आने वाले बरेली-पिपरिया स्टेट हाईवे पर नयागांव में पुल ढह गया. उस समय पुल के ऊपर से गुजर रहीं दो बाइक्स नीचे गिर गई, जिससे एक मजदूर और चार बाइक सवार घायल हुए थे. सभी को पहले बरेली सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में भोपाल एम्स रेफर किया गया.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि, यह पुल पिछले कई दिनों से क्षतिग्रस्त हालत में था. पुल के कमजोर होने या वहां चल रहे निर्माण कार्य को लेकर सड़क पर कोई भी चेतावनी या संकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए थे. इसी कारण बाइक सवार अनजान थे और हादसे का शिकार हो गए. बता दें, यह सभी पुल करीब 50 साल पुराने है और समय-समय पर मरम्मत ना होने के चलते छतिग्रस्त हो रहे हैं.
वहीं अब लगातार हो रहे पुल हादसे के बाद मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग की नींद खुली है. विभाग ने करीब 45 पुलों के सुधार कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की स्वीकृति दी है. इसके पीछे की मुख्य वजह विधानसभा सत्र के दौरान रायसेन में पुल गिरने की घटना के बाद सुरक्षा को लेकर उठे सवालों को लेकर बढ़ा दबाव माना जा रहा है.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें