लुधियाना की वर्ल्ड चैंपियन पावर लिफ्टर कोमलप्रीत की कहानी: डाइट मनी नहीं थी, चंदा जुटा थाइलैंड पहुंची, 350kg वजन उठाया – Ludhiana News

लुधियाना की वर्ल्ड चैंपियन पावर लिफ्टर कोमलप्रीत की कहानी:  डाइट मनी नहीं थी, चंदा जुटा थाइलैंड पहुंची, 350kg वजन उठाया – Ludhiana News


वर्ल्ड चैंपियनशिप थाईलैंड में पावर लिफ्टिंग करती हुई कोमलप्रीत कौर। इनसेट में कोमलप्रीत की फाइल फोटो।

लुधियाना की कोमलप्रीत कौर थाइलैंड में वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप-2025 में गोल्ड मेडल जीत कर वापस घर लौटी। वर्ल्ड चैंपियन बनने से कोमलप्रीत और उसका परिवार बेहद खुश है। वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए कोमलप्रीत को कड़ा संघर्ष करना पड़ा। यह संघर्ष उन्होंन

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कोमलप्रीत को खेल के हिसाब डाइट तक नसीब नहीं होती। हालात इतने खराब हैं कि जब उसे वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए थाइलैंड जाना था तो उसके पास पैसे ही नहीं थे। चाचा व अन्य रिश्तेदारों ने पैसे इकट्‌ठा किए लेकिन बात नहीं बनी। फिर पूर्व एमएलए सिमरजीत सिंह बैंस ने 50 हजार रुपए की सहायता राशि दी। ऐसे करके थाइलैंड पहुंची और चैंपियन बनकर लौटी।

कोमलप्रीत की उम्र 21 साल है और उसका वेट 63 किलोग्राम है। उसने 25 नवंबर से 27 नवंबर तक थाइलैंड में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। उसने जूनियर वर्ग के रॉ केटेगरी में 350 किलोग्राम वेट पावर लिफ्ट किया और वर्ल्ड चैंपियन बन गई।

दादी कोमलप्रीत के गले में मेडल डालते हुए साथ में है उसकी मां।

2022 में शुरू की गेम, 3 साल में बन गई वर्ल्ड चैंपियन कोमलप्रीत कौर ने बताया कि स्कूल स्तर पर वो किक बॉक्सिंग, खो-खो और ताइक्वांडो जैसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेती थी। जब वह ग्रेजुएशन करने गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स में गई तो वेट लिफ्टिंग की कोच संदीप कौर ने उसे पावर-लिफ्टिंग के लिए प्रेरित किया। तब उसका वेट 48 किलोग्राम था। प्रैक्टिस शुरू की और एक के बाद एक प्रतियोगिता में जीत हासिल करती गई।

2023 में पहली बार स्टेट लेवल पर खेली और गोल्ड मेडल हासिल किया। अब तक स्टेट लेवल पर सात प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया जिसमें से 4 गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल हासिल किए। 2024 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल चैंपियन बनी। अब 2025 में गोल्ड मेडल जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बन गई।

कोच संदीप कौर कोमलप्रीत कौर को वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी करवाते हुए।

कोच संदीप कौर कोमलप्रीत कौर को वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी करवाते हुए।

इक्विप्ड में 420 और रॉ में 350 किलोग्राम पावर लिफ्ट करती है कोमलप्रीत ने बताया कि पावर लिफ्टिंग के दो पार्ट हैं। एक इक्विप्ड और दूसरा रॉ। इक्विप्ड में किट पहनकर वेट लिफ्ट किया जाता है। इसमें वो 420 किलोग्राम तक पावर लिफ्ट कर चुकी है। वहीं रॉ में सामान कॉस्टयूम पहनकर वेट लिफ्ट किया जाता है। इसमें वो 350 किलोग्राम तक उठा चुकी है। थाइलैंड में भी उसने इसी केटेगरी में 350 किलोग्राम भार पावर लिफ्ट किया।

वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए कोमलप्रीत का संघर्ष, जानिए:

  • पिता करते हैं फैक्ट्री में काम: कोमलप्रीत कौर के पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं और 15 से 20 हजार रुपए महीना कमाते हैं। कोमलप्रीत पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी होनहार है। कोमलप्रीत ने जब पावर लिफ्टिंग में जाने का फैसला किया तो परिवार ने भी उसको अनुमति दे दी।
  • दो दिन ही मिल पाता नॉनवेज: कोमलप्रीत ने पावर लिफ्टिंग गेम शुरू की पता चला कि इसमें डाइट का बड़ा रोल है और उसे सप्ताह में कम से कम छह दिन नॉनवेज खाना पड़ेगा। कोच ने डाइट प्लान दिया तो परिवार के लिए उसे फॉलो करना मुश्किल था। परिवार ने अपनी तरफ पूरा जोर लगाया लेकिन वो उसे सप्ताह में दो दिन उसे नॉनवेज दे पाते हैं।
  • प्रोटीन डाइट नहीं कर पाई शुरू: कोच ने प्रोटीन लेने की सलाह दी थी लेकिन उसे वो वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद भी शुरू नहीं कर पाई। इसके पीछे कारण उसके परिवार की आर्थिक तंगी है। कोमल की कंप्लीट डाइट का खर्च 10 हजार रुपए प्रति माह है। इतने पैसे उसकी डाइट पर खर्च करना परिवार के लिए संभव नहीं है।
  • नहीं हारी हिम्मत: डाइट पूरी न होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। डिस्ट्रिक्ट लेवल के बाद स्टेट और फिर नेशनल तक जीत हासिल की। पिछले महीने वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जाना था तो थाइलैंड जाने के लिए पैसे नहीं थे। तमाम कमियों के बाद उसने अपना हौसला बनाए रखा और जीत हासिल की।
  • नौकरी करनी चाही तो परिवार ने रोका: कोमलप्रीत ने बताया कि पिता बीमार रहते हैं तो उनकी दवाई का भी खर्च है। ऐसे में उन्होंने ग्रेजुएशन के साथ नौकरी करने का फैसला किया लेकिन परिवार ने मना कर दिया और अपने गेम पर फोकस करने को कहा। परिवार की हौसला अफजाई के कारण ही वो आज वर्ल्ड चैंपियन बन पाई।
  • कोच संदीप कौर ने फ्री में दी कोचिंग: कोमलप्रीत कौर का कहना है कि उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती कोच और उनकी फीस को लेकर थी लेकिन उसे अच्छी कोच के रूप में संदीप कौर मिली। उन्होंने फ्री में कोचिंग दी। जब उसे वेट बढ़ाना था तो उसकी डाइट का इंतजाम भी किया।
कोमलप्रीत अपने मेडल व सर्टिफिकेट के साथ

कोमलप्रीत अपने मेडल व सर्टिफिकेट के साथ

कोमल का एकेडमिक रिकार्ड भी शानदार कोमलप्रीत कौर का स्पोर्ट्स रिकार्ड के साथ एकेडमिक रिकार्ड भी शानदार है। 10 वीं कक्षा में 99.9 प्रतिशत अंक हासिल किए। कोविड की वजह से उस साल मेरिट सूची नहीं बनी। 12 वीं कक्षा में 98.8 फीसदी अंक लेकर पूरे राज्य में चौथा स्थान हासिल किया। ग्रेजुएशन में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और इस समय जीएनए यूनिवर्सिटी फगवाड़ा से फिजिकल एजुकेशन में मास्टर डिग्री ले रही है।



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