ग्राउंड रिपोर्ट: खरगोन के सबसे बड़े मुक्तिधाम के पास कचरा घर! महीनों तक नहीं होती सफाई, 50 गांवों के लोग परेशान

ग्राउंड रिपोर्ट: खरगोन के सबसे बड़े मुक्तिधाम के पास कचरा घर! महीनों तक नहीं होती सफाई, 50 गांवों के लोग परेशान


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Khargone News: मध्य प्रदेश का इंदौर देश का सबसे साफ शहर है. इसी जिले के बगल में खरगौन जिला. यहां सफाई का हाल बेपटरी है. जिले के सबसे बड़े मुक्तिधाम के पास कचरा महीनों तक पड़ा रहता है. अंतिम संस्कार करने आने वाले लोग दुर्गंध में खड़े रहने को मजबूर रहते हैं. जानें हाल…

Khargone News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही ‘स्वच्छ भारत–स्वस्थ भारत’ अभियान की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण इंदौर है, जो लगातार सातवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने का रिकॉर्ड बना चुका है. लेकिन, इंदौर से लगे हुए खरगोन जिले की स्थिति इसके बिल्कुल उलट है. यहां ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता की हालत बदतर है. कई गांव आज भी गंदगी और कचरे के ढेर के बीच जीने को मजबूर हैं. लोगों के अनुसार शिकायतें करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है.

Local18 की टीम ने जब जिले के धार्मिक ओर पवित्र नगर मंडलेश्वर के पास स्थित लाड़वी पंचायत के ग्राम नवलपुर का दौरा किया तो वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आई. यह वही स्थान है, जहां जिले का सबसे बड़ा मुक्तिधाम है. आसपास के करीब 50 गांवों के लोग अंतिम संस्कार करने यहां आते हैं. लेकिन, मुक्तिधाम के बाहर रहवासी बस्ती के पास अंतिम दर्शन स्थल (बोर चिंदी) के आस-पास लंबे समय से कचरे का बड़ा ढेर जमा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह कचरा कई महीनों तक नहीं उठाया जाता.

कचरा उड़कर घर में आता है
स्थानीय निवासी कमल तवर बताते हैं कि गांव में घरों से निकलने वाला कचरा इसी स्थान पर फेंका जाता है. लोग मरे हुए जानवर भी यहां डाल देते हैं. मेरा घर इस कचरे के ढेर से कुछ ही कदम की दूरी पर है, जिसके कारण हमेशा बदबू आती है. हवा तेज चलती है तो कचरा उड़कर घर के भीतर तक पहुंच जाता है. पंचायत के जिम्मेदारों को कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब गंदगी के बीच रहने की आदत पड़ती जा रही है.

तीन महीने पहले उठा था कचरा 
मुकेश कटारे और शेरू तंवर बताते हैं कि ग्राम पंचायत ने करीब 5–7 साल पहले यहां कंक्रीट की कचरा पेटी तैयार करवाई थी, ताकि कचरा एक जगह एकत्रित हो सके. इसके बाद से ही गांव का पूरा कचरा इसी में डाला जाने लगा. लेकिन यह कचरा पेटी महीनों तक खाली नहीं होती. ढेर बढ़ते-बढ़ते सड़क तक फैल जाता है. करीब तीन महीने पहले आखिरी बार कचरा उठाया गया था, इसके बाद से कोई सफाई नहीं हुई.

कचरे से घिरी रहती है बोर चिंदी 
नदी स्नान के लिए भी लोगों को इसी कचरे के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. गंदगी का सबसे बड़ा असर अंतिम दर्शन स्थल पर आता है. जब परिजन शव को कचरे से घिरी बोर चिंदी पर रखते हैं, तो आसपास फैली बदबू के कारण परिजनों को मुंह ढककर खड़ा होना पड़ता है. धार्मिक नगरी मंडलेश्वर के पास स्थित इस गांव में ऐसी स्थिति प्रशासन की गंभीर लापरवाही को भी दर्शाती है.

बजट की कमी है…
इस संबंध में पंचायत सचिव रमण कुशवाह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि नियमित सफाई के लिए पंचायत के पास कोई व्यवस्था नहीं है. बजट की कमी के कारण न तो कचरा गाड़ी रखी जा सकती है और न सफाई कर्मी, इसलिए समय-समय पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूरों की मदद से कचरा उठवाया जाता है. वहीं, पंचायत सरपंच रतन सिंह रंधावा का कहना है कि कुछ दिन पहले ही कचरा उठाया गया था और फिर से इकट्ठा हुआ है. उन्होंने आश्वासन दिया कि एक-दो दिनों में सफाई करवा दी जाएगी.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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खरगोन के सबसे बड़े मुक्तिधाम के पास कचरा घर! 50 गांवों के लोग परेशान



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