शाजापुर जिला अस्पताल में आत्महत्या रोकथाम का गेटकीपर प्रशिक्षण: 32 CHO और 5 आशा सुपरवाइजर को मिला प्रशिक्षण – shajapur (MP) News

शाजापुर जिला अस्पताल में आत्महत्या रोकथाम का गेटकीपर प्रशिक्षण:  32 CHO और 5 आशा सुपरवाइजर को मिला प्रशिक्षण – shajapur (MP) News


शाजापुर जिला अस्पताल में आत्महत्या रोकथाम का गेटकीपर प्रशिक्षण

शाजापुर जिला अस्पताल में बुधवार को आत्महत्या रोकथाम के लिए गेटकीपर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे की समय पर पहचान कर प्रभावी हस्तक्षेप क

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इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। उन्हें राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, मानसिक रोगों की पहचान, तनाव, अवसाद और आत्महत्या के चेतावनी संकेतों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, पीड़ित व्यक्ति से सही तरीके से संवाद करने की विधियों पर भी चर्चा हुई।

जिला अस्पताल में पदस्थ मनोवैज्ञानिक डॉ. क्षितिज मुरारी ने बताया कि यह प्रशिक्षण विशेष रूप से मोहन बड़ोदिया ब्लॉक के 32 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) और 5 आशा सुपरवाइजर को दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान आत्महत्या की प्रवृत्तियों को समझने, जोखिम कारकों की पहचान करने और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर उचित उपचार एवं परामर्श से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. मुरारी के अनुसार, इस तरह का प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलती है और आत्महत्या की घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलती है।विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या, तनाव और मानसिक रोग एक-दूसरे से गहरे जुड़े होते हैं।

1. आत्महत्या के कारण

  • अत्यधिक तनाव (पारिवारिक, आर्थिक, नौकरी या परीक्षा से जुड़ा)
  • अवसाद (डिप्रेशन) और निराशा की भावना
  • मानसिक रोग जैसे बायपोलर डिसऑर्डर, सिज़ोफ्रेनिया
  • नशे की लत (शराब, ड्रग्स)
  • अकेलापन और सामाजिक समर्थन की कमी
  • आघात (ट्रॉमा) – घरेलू हिंसा, यौन शोषण, बड़ी दुर्घटना
  • पुरानी बीमारी या असहनीय दर्द
  • असफलता, अपमान या रिश्तों में टूटन

2. तनाव (Stress) के कारण

  • काम या पढ़ाई का अत्यधिक दबाव
  • आर्थिक समस्याएं
  • पारिवारिक कलह या वैवाहिक विवाद
  • बीमारी या मृत्यु का डर
  • जीवन में अचानक बड़ा बदलाव
  • भविष्य को लेकर असुरक्षा

तनाव के संकेत

  • चिड़चिड़ापन, घबराहट
  • नींद न आना या अधिक सोना
  • सिरदर्द, थकान
  • एकाग्रता में कमी

3. मानसिक रोग की पहचान के लक्षण

  • लंबे समय तक उदासी, भय या घबराहट
  • रोजमर्रा के कामों में रुचि खत्म होना
  • बार-बार नकारात्मक विचार
  • बातचीत या व्यवहार में अचानक बदलाव
  • अलग-थलग रहना
  • आत्महत्या या मृत्यु की बातें करना

4. रोकथाम के उपाय

  • समय पर परामर्श और इलाज
  • परिवार व समाज का भावनात्मक सहयोग
  • नशे से दूरी
  • जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक/काउंसलर से संपर्क



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