बाणसागर क्षेत्र में अवैध रेत खनन चरम पर पहुंच गया है। सोन और बनास नदियों से दिनदहाड़े रेत का उत्खनन किया जा रहा है। घाटों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। शहडोल में रेत ठेका कंपनी सहकार ग्लोबल का ठेका निरस्त हो गय
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सोन, बनास, कुबरी, जनकपुर, सथनी और सुखाड़ सोन नदी के घाटों पर जेसीबी मशीनें खुलेआम नदी में उतारी जा रही हैं। दिनभर ट्रैक्टरों से रेत भरी जाती है, जिसे शाम होते ही हाईवा ट्रकों के माध्यम से बनारस, रीवा और प्रयागराज तक पहुंचाया जाता है। बाणसागर क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन का विरोध करने पर उन्हें धमकियां मिलती हैं।
पिछले दशक में कर्मचारियों पर कई हमले
पिछले एक दशक में बाणसागर क्षेत्र में अवैध रेत माफिया द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर कई हमले किए गए हैं। यह दर्शाता है कि यह केवल आकस्मिक खनन नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का काम है।
साल 2016-17 में जनकपुर-सोन घाट पर पुलिस टीम पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया गया था, जिसमें पथराव के कारण गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई थी। 2018 में बनास नदी क्षेत्र में राजस्व अधिकारियों पर हमला हुआ, जिसमें एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया।
2019 में कुबरी घाट पर पंचायत सचिव और पटवारी की पिटाई की गई। 2020 में देवलौंद में पुलिस वाहन को टक्कर मारने की कोशिश की गई, जिससे दो जवान घायल हो गए। 2021 में ब्यौहारी में खनिज विभाग की टीम पर पथराव कर सरकारी वाहन तोड़ा गया, और 2022 में देवलौंद में राजस्व टीम पर डंडों व पत्थरों से हमला किया गया, जिसमें कई कर्मचारी घायल हुए।
2023 में पटवारी प्रसन्न सिंह को अवैध खनन रोकने के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया गया। इसके बाद 2024 में बदोली में एएसआई महेंद्र बागरी को भी रेत माफिया ने ट्रैक्टर से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।