Ex-India pacer Dodda Ganesh on mental health battle said, Didn’t step out of my house for a month | उथप्पा के बाद भारत के पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश बोले- टीम से बाहर होने पर एक महीने घर से नहीं निकला था

Ex-India pacer Dodda Ganesh on mental health battle said, Didn’t step out of my house for a month | उथप्पा के बाद भारत के पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश बोले- टीम से बाहर होने पर एक महीने घर से नहीं निकला था


  • पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश ने कहा- 23 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हो जाना दिल तोड़ने वाला था
  • कर्नाटक के तेज गेंदबाज डोडा गणेश ने अपने करियर में सिर्फ 4 टेस्ट और एक वनडे खेल, उन्होंने सभी मैच विदेशों में खेले

दैनिक भास्कर

Jun 05, 2020, 04:29 PM IST

रॉबिन उथप्पा के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज डोडा गणेश ने भी क्रिकेट से जुड़े तनाव को लेकर ट्वीटर पर अपनी बात रखी। गणेश ने बताया कि जब वे 23 साल के थे, तब उन्हें राष्ट्रीय टीम से ड्रॉप किया गया था। इससे वे इतने निराश हो गए थे कि करीब एक महीने तक घर से नहीं निकले।

कर्नाटक के इस तेज गेंदबाज ने 1997 में भारत के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने अपने करियर में सिर्फ 4 टेस्ट ही खेले। गणेश ने इकलौता वनडे 1997 में जिम्बाब्बे के खिलाफ खेला था। इसके बाद वे कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी नहीं कर पाए। फिलहाल वे गोवा रणजी टीम के हेड कोच हैं। 

1999 वर्ल्ड कप की टीम में नहीं चुना गया: गणेश

उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। इसमें लिखा,‘‘1997, 1998 और 1999 में मैंने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया। 1999 में कर्नाटक रणजी चैंपियन बना और तब मैंने रिकॉर्ड 63 विकेट लिए। मुझे उम्मीद थी कि 1999 वर्ल्ड कप के लिए टीम में मौका मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’’

मुझे कमतर गेंदबाजों को मौका मिला: गणेश

डोडा ने आगे लिखा, ‘‘मेरे लिए यह दुनिया के खत्म होने जैसा था। मैं इस बात को नहीं पचा पाया कि बिना मौका दिए ही मुझे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर कर दिया गया, जबकि मेरी उम्र सिर्फ 23 साल थी। मेरे अंदर काफी क्रिकेट बची थी। लेकिन मेरी कभी टीम इंडिया में वापसी नहीं हुई।’’

हां, इक्का-दुक्का बार मुझे इंडिया-ए टीम के साथ विदेशी दौरों पर जाने का मौका मिला। यह मेरे सीने में खंजर घोपने जैसा था। क्योंकि मैंने ऐसे कई गेंदबाजों को देखा, जिनका प्रदर्शन मुझसे कमतर था लेकिन उन्हें टीम इंडिया में चुना गया लेकिन मुझे इस लायक नहीं समझा गया।   

‘क्रिकेट के बाहर भी दुनिया है’

उन्होंने लिखा तब आपको आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने और हुनर दिखाने के लिए आईपीएल जैसा मंच नहीं था। ऐसे में सिलेक्टर्स को प्रभावित करने के लिए सिर्फ डोमेस्टिक क्रिकेट ही था। उसमें भी अगर एक सीजन अच्छा नहीं गया तो आपको एक साल इंतजार करना पड़ता था।

डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे खिलाड़ियों को मेरी यही सलाह है कि वे सिर्फ क्रिकेट को ही जिंदगी नहीं माने। इससे बाहर भी दुनिया है। अपने परिजन हैं, जो आपको प्यार करते हैं। 

उथप्पा ने भी खुदकुशी की बात कही थी

हाल ही मे भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने कहा था कि 2009 से 2011 का समय उनके लिए सबसे कठिन रहा था। इस दौरान वे डिप्रेशन में आ गए थे। उथप्पा ने कहा कि हर रोज उनके मन में खुदकुशी के ख्याल आते थे। ऐसा लगता था जैसे बालकनी से कूद जाऊं।





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