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Khargone News: एक बार यह स्थिति आ जाए, तो कोई भी दवा असर नहीं करती, इसलिए शुरुआत में ही पहचान और इसका उपचार करना बेहद जरूरी है. इस समय किसान हर रोज अपने खेतों का निरीक्षण करें. अगर कहीं एक-दो पौधों या बालियों में सफेदी दिखे, तो सतर्क हो जाएं.
खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन में गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है. जिन किसानों ने समय पर बुआई की थी, उन खेतों में बालियां निकलने लगी हैं, तो कई जगह फसल बाली निकलने की अवस्था में है. यही वो समय है, जब गेहूं की फसल पर दीमक का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है. अगर इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो मेहनत से तैयार की गई फसल कुछ ही दिनों में सूखकर बर्बाद हो सकती है. किसानों की इस समय खेतों की लगातार निगरानी करना चाहिए. विशेषज्ञ बताते हैं कि जब गेहूं में बालियां निकलती हैं, तभी दीमक जड़ों पर हमला शुरू कर देती है. दीमक पौधों की जड़ों को धीरे-धीरे खा जाती है, जिससे पौधों तक पानी और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते. इसका सीधा असर बाली पर पड़ता है और पहले बाली सफेद पड़ने लगती है. अगर समय रहते उपचार नहीं किया गया, तो पूरी फसल सूख सकती है. कई बार किसान इसे सामान्य सूखना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है.
जड़ों को पौधों से अलग कर देती है दीमक
उन्होंने आगे बताया कि समय पर बोवनी करने वाले किसानों के खेतों में गेहूं को फसल अब 50 से 60 दिन की हो चुकी है और बालियां निकलना शुरू हो गया है जबकि पछेती बोवनी वाले खेतों में फसल अभी इसी अवस्था में पहुंचने वाली है. यही समय सबसे ज्यादा सतर्क रहने का है. दीमक जड़ों को पौधों से अलग कर देती है, जिससे पौधे अचानक मुरझा जाते हैं और बालियां सफेद होकर सूख जाती हैं.
दीमक के शुरुआती लक्षण क्या है?
एक बार यह स्थिति आ जाने पर कोई भी दवा असर नहीं करती, इसलिए शुरुआत में ही पहचान और उपचार बेहद जरूरी है. इस समय किसान रोजाना अपने खेतों का निरीक्षण करें. अगर कहीं एक-दो पौधों या बालियों में सफेदी नजर आए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं. यह दीमक का शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में देरी किए बिना नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए ताकि नुकसान को फैलने से रोका जा सके.
बीमारी का नियंत्रण कैसे करें?
कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि दीमक के प्रकोप की शुरुआत दिखाई देने पर क्लोरोपायरीफॉस दवा का उपयोग किया जा सकता है. एक लीटर दवा प्रति एकड़ की दर से सिंचाई के पानी के साथ खेत में देना चाहिए. इससे दवा सीधे जड़ों तक पहुंचती है और दीमक का प्रभावी नियंत्रण हो जाता है. यह दवा बाजार में आसानी से उपलब्ध है और सही समय पर उपयोग करने से फसल को बचाया जा सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.