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Balaghat News: बिजली के स्रोत को सबसे पहले बंद करना चाहिए. इसके बाद जानवर की धड़कन चल रही है या नहीं, यह चेक कर लें. अगर पशु बेहोश हो जाए, तो उसे समतल जगह पर लिटा दें. करंट लगने के बाद देखा जाता है कि जानवर के मुंह से झाग आने लगता है.
बालाघाट. भारतीय कृषि में पशुओं का अहम योगदान है. ऐसे में किसान भी पूरी निष्ठा से पशुओं का ख्याल रखते हैं लेकिन मानसून ही नहीं ठंड के दिनों में भी करंट लगने का खतरा बना रहता है. मध्य प्रदेश के बालाघाट में बीते कुछ समय में ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं. ऐसी स्थिति में पशुपालकों को क्या करना चाहिए. दरअसल इस स्थिति में कई बार पशु घबरा जाते हैं और ऐसा काम कर बैठते हैं, जिससे समस्या और भी बढ़ जाती है. ऐसे में लोकल 18 ने पशु विशेषज्ञ डॉक्टर बादल पटले से बातचीत की. उन्होंने कहा कि पशु को करंट लगने पर उसे सीधे छूने की गलती न करें. इससे वे भी करंट की जद में आ सकते हैं. पशु को सीधे छूने के बजाय बिजली के स्रोत को बंद करने की कोशिश करें. तत्काल छूने से खतरा भी बना रहता है. ऐसा इसलिए है कि करंट शरीर में दौड़ता रहता है. धैर्य के साथ स्थिति से निपटने की कोशिश करनी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि मदद करने वाले अक्सर दूसरी गलती यह करते हैं कि वे करंट से पीड़ित पशु पर पानी डाल देते हैं. एक ऐसा मिथक है कि पानी डालने से ठंडक मिलती है लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल पानी विद्युत का सुचालक होता है. ऐसे में पानी करंट की तीव्रता को बढ़ा देता है. पानी डालने से बचना चाहिए. करंट वाली स्थित में पशु को कुछ न खिलाएं. खाना या पानी आंतरिक अंगों को प्रभावित कर सकता है. अगर वन्यजीव करंट की चपेट में आ जाए, तो खुद हाथ न लगाएं. पहले वन विभाग को सूचित करें या फिर पुलिस को. अगर आप इसमें हस्तक्षेप करते हैं, तो कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
फर्स्टएड के तौर पर क्या करें?
सबसे पहले बिजली के स्रोत को बंद करना चाहिए. इसके बाद पशु की धड़कन चल रही है या नहीं, यह जांच लें. वहीं पशु बेहोश हो जाए, तो उसे समतल जगह पर लिटा दें. झटके के बाद देखा जाता है कि पशु के मुंह से झाग आने लगता है. ऐसे में मुंह को धीरे से खोलकर उसे साफ करें ताकि उसे सांस लेने में दिक्कत न हो. करंट के बाद शरीर ठंडा हो सकता है. उसके शरीर को कपड़े से ढककर रखें. पैरों की मालिश भी कर सकते हैं.
डॉक्टर से करें परामर्श
पशु की स्थिति खराब होने पर भी कई लोग खुद ही एक्सपर्ट बन जाते हैं. ऐसे में जानवर की जान पर बन आ सकती है. ऐसा न हो इसलिए कोशिश यह करें कि जल्द से जल्द डॉक्टर के पास पशु को लेकर जाएं और उसका इलाज कराएं. अपने आसपास नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र का नंबर जरूर रखना चाहिए. आपातकालीन स्थिति में मध्य प्रदेश में पशु चिकित्सा वाहन 1962 पर कॉल कर सकते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.