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Winter Child Care Tips: सर्द मौसम ने शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों में दस्तक देते ही छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर घर-घर चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में अभिभावक केमिकल युक्त बेबी ऑयल छोड़कर फिर से बघेलखंडी दादी-नानी के पुराने घरेलू नुस्खों की ओर लौट रहे हैं, जहां घर में बने प्राकृतिक तेल बच्चों के लिए बेहतर माने जा रहे हैं.
Winter Child Care Tips: बघेलखंड अंचल में जैसे-जैसे ठंड ने अपनी पकड़ मजबूत की है, वैसे-वैसे छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है. गलन भरी हवाएं, कोहरा और गिरता तापमान बच्चों की नाजुक त्वचा और सेहत पर सीधा असर डालता है. ऐसे समय में एक बार फिर घर में बनाए जाने वाले प्राकृतिक मालिश तेल चर्चा में हैं. दादी-नानी के जमाने से चले आ रहे ये देसी नुस्खे आज भी आधुनिक कैमिकल बेस्ड बेबी ऑयल को कड़ी टक्कर दे रहे हैं और माता-पिता का भरोसा जीत रहे हैं.
ठंड बढ़ते ही देसी तेलों की बढ़ी मांग
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही सरसों, तिल और नारियल तेल जैसे प्राकृतिक तेलों की मांग स्थानीय बाजारों में तेजी से बढ़ी है. खासतौर पर सरसों के तेल में लहसुन, अजवाइन और हींग डालकर तैयार किया जाने वाला तेल या नारियल तेल में कपूर और हल्दी मिलाकर बनाया गया मिश्रण लोगों की पहली पसंद बन रहा है. इन घरेलू तेलों को लेकर लोगों का मानना है कि ये न केवल बच्चों को ठंड से बचाते हैं, बल्कि उनकी त्वचा को कोमल और शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाते हैं.
दादी-नानी के नुस्खों पर लौटता भरोसा
लोकल 18 से बातचीत में सतना की स्थानीय निवासी मीना द्विवेदी बताती हैं कि आज के समय में केमिकल युक्त बेबी ऑयल से माता पिता बचना चाहते हैं. उनका कहना है कि पहले के समय में दादी नानी घर पर ही तेल तैयार कर बच्चों की मालिश करती थीं. उस मालिश में इतनी ताकत होती थी कि बच्चों की त्वचा तो मुलायम रहती ही थी साथ ही हड्डियां भी मजबूत होती थीं. आज जब ठंड और कोहरे का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है तब लोग फिर उन्हीं पुराने नुस्खों की ओर लौट रहे हैं.
कैसे बनाएं बघेलखंडी ताकतदार मालिश तेल
सरसों का तेल लेकर उसमें थोड़ी अजवाइन, एक चुटकी हींग और कुछ लहसुन की कलियां डालकर हल्का गर्म किया जाता है. इसके बाद तेल को छान लिया जाता है. यह तेल बच्चों की मालिश के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है. इससे ठंड से बचाव होता है और शरीर में गर्माहट बनी रहती है. वहीं, दूसरा नुस्खा नारियल तेल में थोड़ा कपूर और हल्दी मिलाकर तैयार किया जाता है जो त्वचा की नमी बनाए रखने और चमक लाने में मददगार बताया जाता है. ऐसे समय में तो इन देसी नुस्खों की लोकप्रियता का असर भी बाजारों पर दिखता है. कच्चे तेलों, अजवाइन, लहसुन और कपूर जैसे मसालों की बिक्री बढ़ जाती है. महिलाओं का तो कहना है की का कहना है कि लोग अब रेडीमेड ऑयल की जगह खुद तेल बनाना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं.
प्राकृतिक रूप से बने इन तेलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता. यही वजह है कि माता-पिता इन्हें बच्चों की सेंसिटिव स्किन के लिए ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. ठंड के इस मौसम में बघेलखंडी दादी-नानी के ये पुराने नुस्खे एक बार फिर बच्चों की सेहत का मजबूत सहारा बनते नजर आ रहे हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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