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Deenbandhu Seva Samiti: आजादी के बाद पलायन के दौर में जब सिंधी समाज ने सतना को अपना नया ठिकाना बनाया तब एक ही संकल्प लिया गया की समाज का कोई भी व्यक्ति मजबूरी में हाथ न फैलाए. इसी सोच से जन्मी दीनबंधु सेवा समिति आज 50 रुपये मासिक सहयोग से जरूरतमंद परिवारों की शिक्षा, भोजन, इलाज और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है.
Deenbandhu Seva Samiti: आज़ादी के बाद जब देश के अलग–अलग हिस्सों से लोग पलायन कर नए ठिकाने तलाश रहे थे तब कई समाजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी सम्मान के साथ जीवन यापन. सतना में बसे सिंधी समाज ने उस दौर में एक मजबूत संकल्प लिया कि उनका समाज कभी भीख पर निर्भर नहीं होगा. इसी सोच ने जन्म दिया एक ऐसी सेवा परंपरा को जो आज दीनबंधु सेवा समिति के रूप में सैकड़ों परिवारों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन चुकी है. सीमित संसाधनों और छोटे सहयोग से शुरू हुई यह मुहिम आज निस्वार्थ सेवा की मिसाल बन गई है.
सेवा की नींव और गठन की कहानी
दीनबंधु सेवा समिति का गठन वर्ष 1974 में किया गया था. संस्था के सह मंत्री संजय वाधवानी लोकल 18 से बताते हैं कि 1947 के बाद जब सिंधी समाज सतना पहुँचा तब बुजुर्गों ने यह महसूस किया कि अगर समय रहते समाज ने अपने कमजोर वर्ग को सहारा नहीं दिया तो भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है. इसी सोच के तहत निर्धन और निसहाय परिवारों की सहायता की शुरुआत हुई जो आगे चलकर एक संगठित समिति के रूप में स्थापित हुई.
50 रुपये से बदल रही है ज़िंदगी
इस समिति की सबसे खास बात यह है कि सतना के सिंधी कैम्प क्षेत्र के व्यापारी मात्र 50 रुपये प्रतिमाह का सहयोग करते हैं. इसी छोटे-छोटे योगदान से एक बड़ा सामाजिक मॉडल खड़ा किया गया है. लोकल 18 से बातचीत में दीनबंधु सेवा समिति के मंत्री घनश्यामलाल मंघनानी ने बताया कि वे पिछले 18 वर्षों से समिति से जुड़े हैं और वर्तमान में प्रति माह लगभग 100 जरूरतमंद परिवारों तक राशन सामग्री पहुँचाई जा रही है.
राशन से लेकर शिक्षा और चिकित्सा तक सहायता
समिति द्वारा प्रत्येक परिवार को प्रति माह 5 किलो आटा, 1 किलो गेहूं, आधा किलो दाल, शक्कर, तेल और अन्य आवश्यक सामग्री सौ परिवारों वितरित की जाती है. इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई, स्कूल-कॉलेज की किताबें और कॉपियां निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं. खास बात यह है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वही पुस्तकें अगले जरूरतमंद छात्र को दे दी जाती हैं जिससे संसाधनों का सही उपयोग हो सके.
शादी से शोक तक, हर मोड़ पर साथ
दीनबंधु सेवा समिति केवल जीवन की बुनियादी जरूरतों तक सीमित नहीं है. जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी, चिकित्सा सहायता, रहने-खाने की व्यवस्था और यहां तक कि मरणोपरांत शोक कार्यों तक में समिति सहयोग करती है. दीनबंधु कार्यालय में समाज की आवश्यकता को देखते हुए शोक सभा और शोक कार्यों के लिए निशुल्क हॉल की व्यवस्था भी की गई है.
आत्मनिर्भर बनाने की भविष्य की योजना
समिति का लक्ष्य केवल सहायता देना नहीं बल्कि समाज के हर परिवार को आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए समय-समय पर नई योजनाएं बनाई और लागू की जाती हैं ताकि लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकें और किसी पर आश्रित न रहें. वर्तमान में लगभग 150 सदस्य पूरी तरह निस्वार्थ और निशुल्क भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ये सेवा समिति आज सतना में सामाजिक एकजुटता, आत्मसम्मान और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है. छोटे सहयोग से बड़े बदलाव की यह कहानी न सिर्फ सिंधी समाज बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें