मध्यप्रदेश में बाघ और पेंगोलिन के शिकार कर उनके अंगों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी करने वाले नेटवर्क की महिला सदस्य यांगचेन लाचुंगपा 13 दिनों से जेल में है। इंटरनेशनल तस्कर यांगचेन की। जमानत के लिए अपर सेशन कोर्ट में लगाई याचिका को खारिज किया है।
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प्रथम अपर सेशन न्यायालय के सामने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल ने सटिक विवेचना, अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई। दलीलों व आरोपी की वन्यप्राणियों के तस्करी के अंतर्राष्ट्रीय गिरोह से भूमिका को देखते हुए कोर्ट ने जमानत याचिका निरस्त की। जिससे इंटरनेशनल तस्कर यांगचेन लाचुंगपा फिलहाल नर्मदापुरम के केंद्रीय जेल में ही रहेगी।टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) के सहायक वन संरक्षक विनोद सिंह की टीम 10 दिसंबर को कोर्ट के आदेश पर तस्कर को जेल तक ले गई थी।
सिक्किम से हुई गिरफ्तारी
यांगचेन को 2 दिसंबर को भारत-चीन बॉर्डर के पास सिक्किम के लाचंग, मंगन इलाके से WCCB और STSF की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया था। वहां से उसे फ्लाइट से भोपाल लाया गया और 5 दिसंबर को नर्मदापुरम कोर्ट में पेश कर पांच दिन की रिमांड ली गई थी।
रिमांड के दौरान अधिकारियों ने गिरोह के मास्टरमाइंड जे तमांग, सप्लाई चैन और विदेशी नेटवर्क से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की। टीम ने बैंक ट्रांजैक्शन व वित्तीय लिंक भी खंगाले। एसडीओ ने कहा जांच जारी है, कई अहम तथ्य हैं जिन्हें अभी सार्वजनिक नहीं कर सकते, लेकिन सबूत मजबूत हैं।
2015 में सामने आया था मामला
मामला 2015 से जुड़ा है, जब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघ और पेंगोलिन शिकार का बड़ा नेटवर्क सामने आया था। अंग नेपाल–सिक्किम होते हुए चीन तक भेजे जाते थे। इस केस में 35 आरोपी चिन्हित हुए थे। शिकारियों, कूरिपर, बिचौलिये और तस्करों सहित 31 व्यक्तियों के पूरे गिरोह को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य मास्टरमाइंड जे तमांग अब भी फरार है और उस पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी है। यांगचेन की गिरफ्तारी पहले भी 2017 में हुई थी, लेकिन वह जमानत पर बाहर आकर फरार हो गई। 2019 में उसकी अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने खारिज की थी। वह नेपाल, भूटान और चीन से जुड़े वाइल्डलाइफ तस्करी नेटवर्क में सक्रिय बताई गई। इसी केस में ताशी शेरपा को 2024 में दार्जिलिंग से पकड़ा गया और 2025 में दोषी करार दिया गया। वह अभी नर्मदापुरम जेल में सजा काट रहा है।