नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज और जबलपुर यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान के तहत बुधवार को नेशनल हाईवे-42 पर सूपाताल के सामने राहगीरों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) और बीएलएस (बे
.
गढ़ा थाना यातायात प्रभारी पूर्वा चौरसिया ने बताया कि जबलपुर शहर में कई ऐसे ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं, जहां सड़क दुर्घटनाएं अधिक होती हैं और कई बार समय पर मेडिकल सुविधा नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मौके पर मौजूद आम नागरिकों द्वारा दी गई प्राथमिक चिकित्सा किसी घायल या बीमार व्यक्ति की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसी उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम के सहयोग से राहगीरों को जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
डमी बॉडी के माध्यम से सीपीआर की विधि सिखाई
मेडिकल कॉलेज के जीडीएमओ इमरजेंसी डॉ. मुकेश साकेत ने बताया कि सड़क पर चलते या खड़े किसी व्यक्ति को कई बार अचानक हार्ट अटैक आ जाता है या उसकी सांस रुक जाती है। ऐसी आपात स्थिति में लोग घबरा जाते हैं और प्राथमिक जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी के अभाव में समय पर मदद नहीं कर पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए डमी बॉडी के माध्यम से सीपीआर देने की सही विधि सिखाई गई, ताकि आपातकाल में कोई भी व्यक्ति बिना घबराए तुरंत सहायता कर सके।
डॉ. साकेत ने बताया कि हार्ट अटैक, सांस रुकने या अचानक तबीयत बिगड़ने जैसी स्थितियों में सीपीआर और बीएलएस तकनीकें अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज की जान बचा सकती हैं। यदि आम नागरिकों को इन तकनीकों का सही प्रशिक्षण मिल जाए, तो कई जिंदगियों को सुरक्षित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण को लेकर राहगीरों में उत्साह
उन्होंने सीपीआर और बीएलएस की प्रक्रिया की भी जानकारी दी। सीपीआर में छाती को सही गहराई और गति से दबाकर रक्त संचार बनाए रखा जाता है, जबकि बीएलएस में एयरवे खोलना, सांस देना और आवश्यकता पड़ने पर एईडी मशीन का उपयोग शामिल होता है। प्रशिक्षण को लेकर राहगीरों में खासा उत्साह देखा गया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज जबलपुर से डॉ. थरून कुमार, डॉ. दिव्यांश नारंग, डॉ. आशिमा, डॉ. कवल प्रीत सेठी सहित अन्य डॉक्टर और यातायात पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।