छतरपुर जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 22 वर्षीय कैदी शंकर प्रजापति ने गुरुवार को जेल की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना उसे 376 पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के महज 24 घंटे बाद सामने आई है। घटना के बाद जेल प्रशासन
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शंकर प्रजापति पिछले तीन वर्षों से विचाराधीन कैदी था। छत से कूदने के बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना से आक्रोशित मृतक के परिजन शुक्रवार सुबह शव को पोस्टमॉर्टम हाउस में छोड़कर न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। परिजनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जेलर दिलीप सिंह जाटव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, जेल प्रशासन की भूमिका की जांच और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
मजिस्ट्रेट ने जांच और न्याय का आश्वासन दिया स्थिति को शांत करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट संघ शिखा बंसकार ने परिजनों से बातचीत की और उनकी बात सुनी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय का आश्वासन दिया। इसके बाद पोस्टमॉर्टम हाउस में पंचनामा तैयार कर शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया।
घटना की सूचना मिलते ही छतरपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक जिला जेल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। इस दौरान सिटी कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद दांगी, गढ़ीमलहरा थाना प्रभारी रीता सिंह सहित भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा।
परिजनों ने जांच में कई सवाल उठाए मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। जिस नाबालिग से जुड़े पॉक्सो मामले में शंकर प्रजापति को सजा सुनाई गई थी, उसी नाबालिग के अलग-अलग समय पर दो युवकों से संबंध होने और दो बच्चों को जन्म देने की बात भी सामने आई है। इस मामले में शंकर को सजा हो चुकी थी, जबकि दूसरे आरोपी राहुल यादव को भी हाल ही में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
सवाल- शंकर दिव्यांग था, छत पर कैसे गया? उनका कहना है कि शंकर शारीरिक रूप से दिव्यांग था, ऐसे में वह जेल की छत तक कैसे पहुंचा, यह गंभीर जांच का विषय है। वहीं दूसरे आरोपी राहुल यादव के पिता ठाकुर दास यादव ने भी नाबालिग लड़की के परिजनों पर पैसों के लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इधर, डीजी ने जेलर को हटाया
पिछले दिनों छतरपुर जेल में हुई गंभीर घटना और कैदियों से अवैध वसूली की शिकायतों के बाद छतरपुर जिला जेल के जेलर दिलीप सिंह जाटव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर योगेन्द्र पमार, जो वर्तमान में केन्द्रीय जेल रीवा में उप जेल अधीक्षक हैं, उन्हें नया प्रभार सौंपा गया है। महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, डॉ. वरूण कपूर ने शुक्रवार को आदेश जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़िए…