झाबुआ जिले के मदरानी में सड़क पर प्रसव के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। कलेक्टर नेहा मीना ने जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के चौकीदार को तत्काल हटा दिया है। वहीं, लापरवाही बरतने पर आशा कार्यकर्ता को सेवा समाप्ति का
.
मेडिकल ऑफिसर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश
जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बुधवार रात सड़क पर हुआ था प्रसव
घटना बुधवार रात की है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को परिजन मदरानी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां चिकित्सा स्टाफ मौजूद नहीं था। मजबूरी में महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।
जांच में सामने आईं कई खामियां
कलेक्टर के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर अवनधती प्रधान के नेतृत्व में जांच दल ने मामले की जांच की। रिपोर्ट में सामने आया कि अस्पताल प्रशासन और फील्ड स्टाफ के बीच समन्वय का अभाव था। जांच में यह भी पाया गया कि प्रसूता का पंजीयन संभावित प्रसव तिथि से सिर्फ चार दिन पहले किया गया था।
ड्यूटी में लापरवाही उजागर
ड्यूटी रोस्टर के अनुसार डॉ. प्रीतम बघेल को ड्यूटी रूम में होना था, लेकिन वे अपने सरकारी आवास में पाए गए। नर्स वेजंती गणावा अवकाश पर थीं, लेकिन उनके स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इस संबंध में बीएमओ को भी सूचना नहीं दी गई।
आशा कार्यकर्ता ने न तो महिला को सही मार्गदर्शन दिया और न ही जरूरी सहयोग किया। वहीं, चौकीदार ने आपात स्थिति की जानकारी ड्यूटी डॉक्टर तक नहीं पहुंचाई।
अब बिना अनुमति नहीं मिलेगा अवकाश
कलेक्टर नेहा मीना ने निर्देश दिए हैं कि अब कोई भी स्वास्थ्यकर्मी सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अवकाश पर नहीं जाएगा और न ही मुख्यालय छोड़ेगा। सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों को सार्थक ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा।
उपस्वास्थ्य केंद्रों पर भी स्टाफ तैनाती की मांग
इधर, आदिवासी एकता परिषद के प्रदेश महासचिव डॉ. कमल सिंह डामोर ने कलेक्टर से मांग की है कि जिले के सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी महिला को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।