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Kol Tribe Community: कोल जनजाति मध्यप्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है. जहां MP में कोल जनजाति की आबादी 10 लाख से भी ज्यादा हैं. जो मुख्य रूप से रीवा, सतना, जबलपुर शहडोल, सीधी, पन्ना और सिंगरौली जिलों में निवास करते है. कोल जनजाति मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी पाई जाती है.
जबलपुर न्यूज: कोल जनजाति मध्यप्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है. जहां MP में कोल जनजाति की आबादी 10 लाख से भी ज्यादा हैं. जो मुख्य रूप से रीवा, सतना, जबलपुर, शहडोल, सीधी, पन्ना और सिंगरौली जिलों में निवास करते है. कोल जनजाति मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी पाई जाती है. यह जनजाति खरवार और कोल मुंडा समूह की एक प्राचीन जनजाति है.
कोल जनजाति का उल्लेख ऋग्वेद मत्स्य पुराण महाभारत और रामायण आदि प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है. जिनका संबंध राम भक्त शबरी माता से माना जाता हैं. यह जनजाति मध्यप्रदेश के विंध्य कैमूर श्रेणियां के मूल निवासी होते हैं. हालांकि यह जनजाति हिंदुओं के आसपास ही होती है. जिसके कारण कोल जनजाति के लोग हिंदू देवी देवताओं की ही पूजा करते हैं. हालांकि इसके अलावा सन्यासी भैरव बाबा, शारदा माता की भी यह जनजाति पूजा करती है.
पंचायत का मुखिया कहलाता है गोटियां
कोल जनजाति के रामू कोल ने बताया भारतीय समाज के नींव के पत्थर आदिवासी हैं. जिसमें कोल समाज का योगदान रहा है. कोल जनजाति की पंचायत को गोरिया और मैयारी कहते हैं. जहां पंचायत का मुखिया गोटियां कहलाता है. कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकूमत की अत्याचार के विरुद्ध 1831 में कोल विद्रोह किया था. कल जनजाति में 22 उपजातियां पाई जाती हैं. ऐसा माना जाता है कि कोल जनजाति में मंगनी विवाह सबसे अच्छा होता है. वहीं आज भी कोल जनजाति के लोग जादू टोना पर विश्वास रखते हैं.
देहका और दादर होता है नृत्य, इस तरह होता है पहनावा
कोल जनजाति का पहनावा बाकी जनजातियों से अलग होता है. जिनका आदिम नृत्य देहका और दादर होता है. कोल जनजाति के अधिकांश लोग खेतिहर मजदूर और उद्योगों में श्रमिक के रूप में काम किया करते हैं. कोल जनजाति के लोग मेहनती और वनोपज मतलब लकड़ी, आंवला इकट्ठा करने का काम किया करते हैं. कोल जनजाति के लोग शाकाहारी के साथ ही मांसाहारी भी होते हैं. जो ज्वार बाजरा के साथ ही मोटे अनाज, कोदो और कुदकी खाते हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश में चावल का भी ज्यादातर इस्तेमाल कोल जनजाति के लोग करते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें