गेहूं की फसल पर मंडरा रहा खतरा! जड़माहू और पीलापन रोकने का क्या है देसी इलाज, जानें एक्सपर्ट से

गेहूं की फसल पर मंडरा रहा खतरा! जड़माहू और पीलापन रोकने का क्या है देसी इलाज, जानें एक्सपर्ट से


अनुज गौतम, सागर: रबी सीजन में सागर समेत पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में करीब 18 लाख हेक्टेयर में फसल बोई गई है. इसमें से 14 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा सिर्फ गेहूं का है. लेकिन इस बार मौसम, मिट्टी और पोषक तत्वों की कमी की वजह से गेहूं की फसल में बीमारियां तेजी से सामने आ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो मेहनत पर पानी फिर सकता है.

कृषि विभाग के अनुसार सागर जिले में इस समय गेहूं की फसल में जड़माहू और पीलापन आने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है. इसकी मुख्य वजह मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और फफूंद का सक्रिय होना है. जिन किसानों की फसल 20 से 25 दिन की हो चुकी है, उन्हें सिंचाई के साथ-साथ उचित उपचार करना बेहद जरूरी है.

रासायनिक खेती से नुकसान, देसी तरीके से फायदा
अब तक अधिकतर किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहे हैं, लेकिन इसका असर यह हुआ कि मिट्टी की ताकत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. हालांकि सागर जिले में अब बदलाव साफ दिख रहा है. यहां 3 हजार से ज्यादा किसान एक से पांच एकड़ तक की जमीन में जैविक और प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. ये किसान खुद तैयार किए गए जीवामृत, नीमास्त्र और पंचगव्य का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इन देसी उपायों की खास बात यह है कि इसमें न तो ज्यादा खर्च आता है और न ही मिट्टी को कोई नुकसान होता है. उल्टा, इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.

कृषि विशेषज्ञ की सलाह
कृषि विशेषज्ञ सुमित विश्वकर्मा बताते हैं कि जो किसान जैविक या प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उन्हें हर सिंचाई के साथ 4 से 5 बार जीवामृत का छिड़काव करना चाहिए. अगर किसान चाहते हैं कि फसल की बढ़वार अच्छी हो, बालियां मजबूत बनें और दाना भरपूर आए, तो पंचगव्य का उपयोग जरूर करें.

पंचगव्य कैसे बनाएं?
पंचगव्य देसी गाय से मिलने वाली चीजों से तैयार होता है. इसमें देशी गाय का गोबर, मूत्र, दूध, दही, घी, गुड़, पानी, नारियल पानी और पका केला या पपीता मिलाया जाता है. इसे एक दिन ढककर रखने के बाद तैयार मिश्रण का 1 लीटर पंचगव्य 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव किया जाता है.

घर पर नहीं बनाना तो क्या करें?
जो किसान इसे खुद नहीं बनाना चाहते, वे जैविक दुकानों से पंचगव्य खरीद सकते हैं. यह रासायनिक दवाओं के मुकाबले दो से तीन गुना सस्ता होता है और करीब 300 रुपये प्रति लीटर में मिल जाता है. समय पर छिड़काव करने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है.



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