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- ITMS Knows That Zebra Crossing Has Been Closed By The Island And The U Turn Of The Car Is Also Very Difficult In This Smart Intersection, He Just Warns And Invoices ..!
जबलपुर16 घंटे पहले
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शहर के कई चौराहों पर यातायात पुलिस और वालंटियर्स की टीम यातायात को नियंत्रित करने का भरसक प्रयास कर रही है पर सही मायनों में ये प्रयास रेत में सुई ढूँढने की तर्ज पर हो रहा है। नगर निगम अर्थात् तीन पत्ती चौक को ही लें तो यहाँ हाल ही में स्मार्ट चौराहा बनाया गया है।
जब ये बन रहा था तब भी चेताया था कि यहाँ जो आईलैण्ड बनाए जा रहे हैं, उनके कारण यू टर्न लेना संभव नहीं होगा, लेकिन विशेषज्ञों ने अपने तर्क देकर ठेकेदार और स्मार्ट सिटी की इंजीनियरिंग का बचाव किया था। आज हालात ये हैं कि मध्यम आकार की कार भी यहाँ बड़ी मुश्किल से यू टर्न लेती है। उससे बड़े वाहनों या एसयूवी को भी यू टर्न लेने के लिए एक बार बैक करना पड़ता है।
हालाँकि जिन भी चौराहों पर पीए सिस्टम को आईटीएमएस से जोड़ दिया गया है, वहाँ यदि नियमों का सही ढँग से पालन हो तो ये व्यवस्था सराही जाएगी पर केवल कैमरों के फोटो का उपयोग चालान तक सीमित हो जाएगा तो निस्संदेह अपेक्षित सकारात्मक परिणाम नहीं मिलेंगे।

संभलिए: जेब्रा क्रॉसिंग आपको कहाँ ले जा रही है।
15 करोड़ से चौराहे बनाने वाली स्मार्ट सिटी तो समझे पहले
चाहे नगर निगम चौक हो या फिर ब्लूम चौक अथवा कोई अन्य चौराहा, इनमें से कई की इंजीनियरिंग गलत है और ये बात ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को समझ में तो आती है पर वो कर कुछ नहीं सकते क्योंकि उनके सुझाव तक को नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारी नजरअंदाज कर देते हैं। नगर निगम चौक और ब्लूम चौक दोनों में ही वाहनों को उन जेब्रा क्राॅसिंग के पहले डंडे की जोर पर रोका जाता है, जो बनी ही गलत है।

एक जगह आईलैण्ड तो दूसरी जगह जेब्रा क्राॅसिंग को डिवाइडर ने बंद कर रखा है। स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वो 15 करोड़ रुपए लगाकर जो 16 चौराहे बना रहे हैं, उनको तकनीकी रूप से सही करें, ताकि जनता की मेहनत की कमाई से टैक्स के रूप में दी गई ये राशि व्यर्थ न हो जाए। साथ ही जिस आईटीएमएस पर उन्होंने 16 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, वो काम का हो न कि खिलौना बन जाए।

जेब्रा क्राॅसिंग पर नजरें तो इनायत करें
इस स्मार्ट चौराहे पर करीब 80 लाख रुपए खर्च हुए हैं। इससे पहले जब पुरानी पनिहारिन की प्रतिमा तोड़कर छोटी रोटरी बनाई गई थी तब भी 40 लाख रुपए खर्च किए गए थे। बाद में ट्रैफिक की स्थिति न सुधरने पर रोटरी को तोड़ना पड़ा। अब यहाँ ये हालात ऐसे हैं कि शाम के वक्त जब आईटीएमएस अर्थात् इंटेलीजेन्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कार्यरत रहता है तो पीए सिस्टम अर्थात् लाउडस्पीकर पर जो गाइडेन्स दिया जा रहा है, वो लोगोें को डराने का काम करता है न कि ट्रैफिक को सुधारने का।
यहाँ तैनात ट्रैफिक पुलिस के कर्मी भी ये समझते हैं पर उनके हाथ में कुछ है नहीं। वहीं जो वालंटियर्स शनिवार और रविवार को काम करते हैं, उनकी ट्रेनिंग नहीं हुई है। उन्हें ट्रैफिक के रूल्स तक नहीं मालूम हैं। उन्हें नहीं मालूम की जेब्रा क्राॅसिंग होती क्या है? और यहाँ तो जेब्रा क्राॅसिंग ही गलत बनी हुई है। ये वालंटियर्स जेब्रा क्राॅसिंग का उपयोग करने वालों के लिए ट्रैफिक रोकते हैं, पर उन्हें ये नहीं मालूम कि जो भी जेब्रा क्राॅसिंग का उपयोग पैदल चलने के लिए करेगा, उसे आईलैण्ड पर चढ़ना पड़ेगा।
बिना चौड़ा किए चौराहा हो गया स्मार्ट
बड़े आश्चर्य की बात है कि तीन पत्ती चौराहा बिना चौड़ीकरण के स्मार्ट हो गया। यहां नगर निगम से लगी हुई दुकानों को हटाने के प्रयास अर्से से चल रहे हैं, पर अभी तक दुकानें कायम हैं। प्लान में इन दुकानों और सामने की ओर के दोनों कार्नर खाली कराने का भी प्रस्ताव है, पर यहां स्मार्ट चौराहा बनाने इन्हें हटाने का प्रयास ही नहीं किया गया। दो बार हाल ही में भारी-भरकम राशि खर्च कर दी गई है। पी-4
- नगर निगम चौराहे पर जरूरी है तकनीकी सुधार
क्या है अभी
- तीन पत्ती चौक पर जेब्रा क्राॅसिंग गलत जगह पर बनी है।
- कोई भी पैदल चलने वाला उसका उपयोग नहीं कर सकता।
- जेब्रा क्राॅसिंग के सामने ट्रैफिक आईलैण्ड बनाया गया है।
- चौराहे के निर्माण में यू टर्न करने लायक जगह नहीं छोड़ी गई।
- मध्यम आकार के वाहन को यू टर्न लेने के लिए बैक करना पड़ता है।
- वाहन के बैक होने में जो समय लगता है वो जाम करा देता है।
क्या होना चाहिए
- वर्तमान जेब्रा क्राॅसिंग को हटाकर नई को सही जगह बनाना चाहिए।
- ऐसी बने कि पैदल चलने वाला उसका निर्बाध उपयोग कर सके।
- आईलैण्ड से जो बाधा आ रही है, उसे दूर करना चाहिए।
- आईलैण्ड छोटे करके यू टर्न के लिए पर्याप्त स्थान बनाना चाहिए।
- यहाँ से यू टर्न न लें, ऐसे सूचना पटल लगाने चाहिए।
- वालंटियर यू टर्न रोकेगा तो ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।
सबसे जरूरी : नगर निगम चौक, जो आज भी तीन पत्ती के नाम से पहचाना जाता है, की जेब्रा क्राॅसिंग के लिए मल्टी-वे ट्रैफिक सिग्नल लाइट और टाइमर लगाए जाने चाहिए। मल्टी-वे सिस्टम में हर ओर जाने के लिए अलग सिग्नल तो होता ही है, साथ ही जो व्यक्ति पैदल सड़क पार करना चाहता है वो सड़क के किनारे लगे टाइमर के बटन को दबा देता है तो उसके लिए ग्रीन और वाहनाें के लिए रेड लाइट हो जाती है। दरअसल विदेशों में पैदल चलने वालोें को प्राथमिकता दी जाती है, भारत में भी इसका प्रयोग होने लगा है और स्मार्ट चौराहों पर ये जरूरी है।
वर्ल्ड रोड ऑर्गनाइजेशन के सुझाव पर बना है नगर निगम चौराहा
ये बड़ी हास्यास्पद बात है कि नगर निगम चौराहे का डिजाइन वर्ल्ड रोड ऑर्गनाइजेशन के सुझाव पर फाइनल किया गया है। शहर के कुल 16 चौराहों पर उनकी सलाह ली गई है। सभी में कोई न कोई दिक्कत है। दैनिक भास्कर ने स्मार्ट सिटी के सीईओ आशीष पाठक से बातचीत की, उन्होंने कहा कि जो भी सुझाव आएँगे चौराहों के सुधार के लिए उन पर अमल किया जाएगा। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :
प्रश्न : नगर निगम चौराहे पर जेब्रा क्राॅसिंग के आगे आईलैण्ड क्यों बनाए गए हैं?
उत्तर : इस चौराहे के साथ ही शहर के 16 चौराहों को वर्ल्ड रोड आर्गनाइजेशन के सुझाव पर बनाया गया है, लेकिन ये सब मेरे आने के पहले हो गया। अब मैं चैक कर इसे ठीक कराऊँगा।
प्रश्न : इसी चौराहे पर ऐसा कोई सूचना पटल क्यों नहीं लगा है कि यू टर्न लेना मना है?
उत्तर : इस पाॅइंट पर भी जल्द ही कोई न कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा?
प्रश्न : शहर का ट्रैफिक सुधारने के लिए स्मार्ट सिटी से क्या प्रयास हो रहे हैं?
उत्तर : आईटीएमएस के रिजल्ट अच्छे हैं, इससे रूल्स तोड़ने वालों को चेताया जा रहा है। जल्द ही शहर के चौराहों पर बेहतर व्यवस्था दिखेगी।
कुछ खामियाँ तो हैं
नगर निगम सहित कई चौराहों पर ट्रैफिक संचालन में खामियाँ देखी जा रही हैं पर ये हमारे बस में नहीं है, क्योंकि इनका निर्माण नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने किया है। ट्रैफिक पुलिस तो यातायात का संचालन करती है। जो अनाउंसमेंट भी हो रहा है, वो आईटीएमएस का ही हिस्सा है। आपने जो मुद्दे बताएँ हैं, उन पर जरूर अमल किया जाएगा। -मयंक चौहान, डीएसपी, ट्रैफिक