Our cow dynasty gives life to the patient and the patient | रोगी और निरोगी को जीवन देता है हमारा गाेवंश

Our cow dynasty gives life to the patient and the patient | रोगी और निरोगी को जीवन देता है हमारा गाेवंश


नीमच7 मिनट पहले

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  • प्रवचन के दौरान मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने कहा

हे ईश! जब आप मनुष्य के हृदय में विराजमान हो जाते हैं, तब उसके बड़े प्रबल कर्मबंधन भी तत्क्षण ही इस प्रकार ढीले पड़ जाते हैं, जैसे कि वन के मध्यभाग में मोर के सम्मुख आ जाने पर चंदन वृक्ष के सर्प मय बंधन शीघ्र ही शिथिल हो जाते हैं। “कल्याण मंदिर स्तोत्र’ का भावार्थ सुनाते हुए मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने प्रवचन के दौरान कही। विकास नगर स्थित आराधना भवन में नियमित प्रवचन के दौरान मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने कहा कि विश्व के जीवन का आधार है भारत, भारत की आत्मा है ग्राम, ग्राम का आधार है कृषक, कृषक का आधार है कृषि और कृषि का आधार है गौवंश। योगी, रोगी और निरोगी इन तीनों को जीवन प्रदान करता है हमारा गौवंश। योगी को योग के लिए, रोगी को स्वस्थ होने के लिए और निरोगी को सदैव स्वस्थ रहने के लिए गोमाता की आवश्यकता रहती है। शेर का बच्चा जन्म लेते ही दहाड़ता है, बकरी का बच्चा मिमियाता है, घोड़े का बच्चा हिनहिनाता है, मनुष्य का बच्चा रोता है, किंतु संसार में केवल मात्र गाय का बच्चा जन्म लेते ही मां कहकर पुकारता है। रासायनिक व स्वास्थ्य की दृष्टि से मां के दूध के पश्चात गाे माता का दूध ही श्रेष्ठ माना गया है। मां के दूध के समान ही गाय के दूध की गुणवत्ता होने से गाय को मां कहकर पुकारा जाता है। जन्म देने वाली मां दूध के माध्यम से संस्कार देती है और गौ माता दूध के माध्यम से संस्कारों का रक्षण करती है, इसलिए गाय मां कहलाती है। जो गाे माता की सेवा करता है, उसके समस्त ग्रह दोष समाप्त हो जाते है।



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