राजगढ़ में पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि बंटोगे तो कटोगे।
राजगढ़ जिले के छापीहेड़ा में बुधवार को मंडी प्रांगण में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन के मंच से पंडित प्रदीप मिश्रा ने राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज को जानबूझकर बांटा जा रहा है।
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इसके पीछे केवल वोट बैंक की राजनीति काम कर रही है। यह स्थिति समाज को भीतर से कमजोर कर रही है और यदि समय रहते चेतना नहीं आई, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हिंदू सम्मेलन का यह दिव्य आयोजन इस बात का प्रमाण है कि समाज में जागरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संत समाज लगातार लोगों को जगाने का कार्य कर रहा है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपने शताब्दी वर्ष में सौ वर्षों से यही काम करता आ रहा है, लेकिन इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग अब भी जाग नहीं पा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोग तब जागते हैं, जब व्यक्तिगत नुकसान सामने आता है। जब तक घर में चोरी न हो जाए, तब तक चेतना नहीं आती। यही स्थिति आज समाज की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी समाज नहीं जागा, तो आने वाला समय और अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।
हिंदू सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
बांग्लादेश का जिक्र, राजनीतिक चेतावनी पंडित मिश्रा ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां डर का माहौल बनाया जा रहा है और हिंदुओं को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है। हिंदुओं को टांग कर जिंदा आग लगा रहे हैं। वह आग नहीं लग रहे हैं, बल्कि दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वह डराने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल हिंसा नहीं, बल्कि हिंदू समाज को कमजोर करने की मानसिकता है। भारत वीरों, संतों और तपस्वियों की भूमि है। यह शिवाजी, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई की धरती है। हिंदू समाज डरकर नहीं, बल्कि संगठित होकर खड़ा होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह न समझा जाए कि हिंदुओं को डराकर दबाया जा सकता है।

राजनेताओं पर सीधा आरोप पंडित प्रदीप मिश्रा ने राजनीति पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आज समाजों और जातियों को आपस में बांटा जा रहा है। कोई राजनेता यहां बैठा होगा तो उसे हमारी बात का बुरा जरूर लगेगा, लेकिन लग जाए तो लग जाए। बहुत अंतर आया जातियों में, समाजों में। हमारे हिंदुओं को बांटा जा रहा है, क्यों बांट रहे हैं, वोट बैंक एकत्रित करना है।
यह देखा जा रहा है कि किस समाज के कितने लोग हैं, किसे कितना पद मिला और किस वर्ग को सत्ता में कितनी हिस्सेदारी मिली। उन्होंने कहा कि यह सब राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कभी विभाजन की शिक्षा नहीं देता। समाज का बंटवारा अंततः पूरे राष्ट्र को कमजोर करता है। यदि समाज इसी तरह बंटता रहा, तो एक दिन पद, प्रतिष्ठा और सत्ता-सब हाथ से निकल जाएंगे।

बोले- भारत हिंदू राष्ट्र था, हिंदू राष्ट्र रहेगा हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर पंडित मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत हिंदू राष्ट्र था, हिंदू राष्ट्र है और हिंदू राष्ट्र रहेगा। यह देश की सांस्कृतिक पहचान है और इस पर किसी की मुहर की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्संग, मंदिर, देवालय, शिवालय और श्मशान किसी एक वर्ग या जाति के नहीं होते, ये सभी के लिए समान होते हैं। यही सनातन की मूल भावना है।
उन्होंने कहा- अलग से सील- ठप्पा लगाने की जरूरत भी नहीं, यह तो पहले से हिंदू राष्ट्र है। किसका सामर्थ्य है कि जो यह कह दे कि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है, यह हिंदू राष्ट्र है और हमेशा रहेगा। कुछ नहीं करना है सारी समस्या का हल एक लोटा जल। कई लोग हमसे सवाल करते हैं कि एक लोटा में रखा क्या है, हम कहते हैं आखिरी में यही लोटा काम आता है।
हम कहते हैं कि 50 लाख की गाड़ी में घूमने वाला व्यक्ति भी एक दिन ₹50 के लोटे में भराकर हरिद्वार चला जाता है।
परिवार के हर सदस्य सप्ताह में एक बार साथ बैठें उन्होंने कहा- हमें सनातन को मजबूत करने की जरूरत है। हमें पहला काम करना पड़ेगा, घर के जितने सदस्य हैं, उनके साथ एक सप्ताह या 15 दिन में एक बार सामूहिक रूप से एक साथ बैठकर भोजन करने की, जिससे उनके और हमारे विचारों का आदान-प्रदान हो सके।
पहले पति-पत्नी बैठते थे, रात्रि में भी उन दोनों की बातें होती थीं। आजकल तो शाम होते से ही खाना खाने के बाद पति-पत्नी अपने अलग-अलग मोबाइल लेकर बस उसे चलाने में मग्न रहते हैं, बस सुबह से उठते हैं और फिर वही चिड़चिड़-चिड़चिड़ होती है।
परिवार में सास सोचती है की बहू को सुधार दूं और बहू सोचती है, सास को सुधार दूं। दोनों के बीच में बेचारा बेटा मंदिर के घंटा की तरह बीच में लटका रहा है, जो आता है, उसे बजा कर चला जाता है।
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भारत माता का जयकारा तो बोलना ही पड़ेगा…जानते हो क्यों…इसलिए जो विधर्मी, जो कठमुल्ले, जो ईसाई मिशनरी हमारी हिंदू संस्कृति पर कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं, उनके कानों में आवाज जाना चाहिए…और तो और महाराष्ट्र के औरंगजेब की उस कब्र को याद करो जहां वह दफन है। उसके कानों भी आवाज जाना चाहिए… पूरी खबर पढ़ें