सपने इतनी जल्दी सच नहीं होते… 75 गेंद पर ठोके 157 रन, फिर छलका इस बदनसीब क्रिकेटर का दर्द

सपने इतनी जल्दी सच नहीं होते… 75 गेंद पर ठोके 157 रन, फिर छलका इस बदनसीब क्रिकेटर का दर्द


Indian Cricket Team: भारतीय क्रिकेट में हाल के दिनों में हुए बदलावों ने कई खिलाड़ियों के करियर को पटरी से उतार दिया है. बेहतर प्रदर्शन के बावजूद कुछ खिलाड़ी टीम से बाहर हैं, तो कुछ लंबे समय से मौके की तलाश में हैं. उन्हीं में से एक सरफराज खान हैं. सरफराज को ऑस्ट्रेलिया दौरे (2024-25) के लिए तो चुना गया था, लेकिन उन्हें एक भी मैच में नहीं उतारा गया. उन्होंने उससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में शतक लगाया था. सरफराज को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में मिली हार के बाद टीम से अचानक बाहर कर दिया गया. वह उसके बाद वापसी नहीं कर पाए हैं.

157 रन की पारी से मचाया तहलका

सरफराज लगातार रन बना रहे हैं, लेकिन चयनकर्ता उनकी ओर देख भी नहीं रहे. बुधवार (31 दिसंबर) को उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में गोवा के खिलाफ 75 गेंदों पर ताबड़तोड़ 157 रन बनाकर मुंबई को 87 रन से जीत दिलाई. यह लगातार चौथी जीत थी जिसने मुंबई को विजय हजारे ट्रॉफी एलीट ग्रुप सी टेबल में टॉप पर बनाए रखा और गोवा की तीन मैचों की जीत का सिलसिला खत्म कर दिया.

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यशस्वी फेल, सरफराज ने लूटी महफिल

सभी की निगाहें यशस्वी जायसवाल पर थीं, लेकिन सरफराज ने दोपहर का शो लूट लिया. उनकी जबरदस्त हिटिंग की बदौलत मुंबई ने 444/8 का विशाल स्कोर बनाया. एक ऐसा टोटल जिसने इंटरवल तक ही मैच का नतीजा तय कर दिया था. गोवा ने कड़ी टक्कर दी और 350 का आंकड़ा पार किया, लेकिन अभिनव तेजराना के 100 रन के बावजूद लक्ष्य हमेशा बहुत दूर था. सरफराज ने मैच में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए नौ चौके और 14 छक्के लगाए. उन्होंने सिर्फ 56 गेंदों में अपना शतक पूरा किया. उनके भाई मुशीर खान ने 66 गेंद पर 60 रन बनाए.

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क्या है सरफराज की ताकत?

सरफराज ने मैच के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “जब मैं आया तो रन-रेट बहुत ज्यादा नहीं था क्योंकि दोनों ओपनर्स ने मुश्किल पहले घंटे को निकाल दिया था. सुबह हमेशा मुश्किलें आती हैं, क्योंकि गेंद हरकत करती है. मैंने पहले खुद को सेट किया और फिर जैसे-जैसे पिच आसान होती गई, मैंने अटैक किया. प्लान था कि जितना हो सके उतने रन बनाए जाएं और एक मजबूत टारगेट सेट किया जाए. जब तक मैं क्रीज पर आया, मुशीर बहुत अच्छी बल्लेबाजी कर रहा था. वह पचास रन बनाने वाला पहला खिलाड़ी था. मैंने बहुत सारे वनडे मैच खेले हैं और मुझे पता है कि पारी को कैसे आगे बढ़ाना है. मेरे पास अच्छा स्वीप और कट शॉट है और इस फॉर्मेट में पांच से ज्यादा फील्डर बाहर नहीं हो सकते. इससे मुझे अपने शॉट खेलने की आजादी मिलती है.”

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सरफराज को किस चीज का अफसोस?

शानदार पारी के बावजूद सरफराज ने माना कि उन्हें एक बात का अफसोस है. उन्होंने अपने भाई मुशीर खान को लेकर कहा, ”हमारा एक कॉमन सपना है कि हम एक ही मैच में शतक बनाएं. हम इस सीजन में रणजी ट्रॉफी में और पिछले हफ्ते भी इसके करीब थे, लेकिन हम दोनों पचास रन बनाकर आउट हो गए. आज मुशीर बहुत अच्छी बैटिंग कर रहा था और मुझे लगा कि हम यह कर सकते हैं, लेकिन सपने इतनी जल्दी सच नहीं होते.”



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