बंजर जमीन उगलने लगी सोना! शिक्षक दंपति ने कर दिया हरा-भरा, हौसला देगी ये कहानी

बंजर जमीन उगलने लगी सोना! शिक्षक दंपति ने कर दिया हरा-भरा, हौसला देगी ये कहानी


Last Updated:

Khandwa News: अंजलेश ने लोकल 18 से कहा, ‘मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे. उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती की. बंजर जमीन को उपजाऊ बनाना हरगिज आसान नहीं था लेकिन मेहनत की, तो आज एक ही समय में 2-3 फसल ले पा रहे हैं और अच्छा मुनाफा हो रहा है.’

खंडवा. कुछ लोग हालात से हार मान लेते हैं लेकिन कुछ लोग उन्हीं हालातों को अपनी ताकत बना लेते हैं. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खिड़गांव गांव की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां एक शिक्षक परिवार ने बंजर और पथरीली जमीन को मेहनत के दम पर हरा-भरा बना दिया. यह कहानी है किसान अंजलेश व्यास और उनके शिक्षक रह चुके माता-पिता की. अंजलेश के पास करीब 16 एकड़ जमीन थी, जो सालों से पथरीली और बंजर पड़ी थी. खेती लायक मिट्टी न होने की वजह से परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन हार मानने के बजाय इस परिवार ने खेती को ही अपनी किस्मत बदलने का जरिया बना लिया.

लोकल 18 से बातचीत में अंजलेश ने कहा, ‘मेरे माता-पिता दोनों शिक्षक थे. उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती को हाथ में लिया. बंजर जमीन को उपजाऊ बनाना आसान नहीं था लेकिन मेहनत की, तो आज एक ही समय में दो से तीन फसल ले पा रहे हैं और अच्छा मुनाफा भी हो रहा है.’

धीरे-धीरे जमीन में आई जान
अंजलेश बताते हैं कि सबसे पहले पथरीली जमीन को गड्ढे कराकर भुरभुरी बनाया गया ताकि पौधों की जड़ें आसानी से फैल सकें. धीरे-धीरे जमीन में जान आई और हरियाली लौटने लगी. आज उनकी 16 एकड़ जमीन पर सुबूल के पेड़, हल्दी और कई तरह की सब्जियों की खेती हो रही है. सब्जियों से उन्हें रोज की आमदनी मिलती है, हल्दी से सालाना आय होती है और सुबूल के पेड़ भविष्य के लिए लंबे समय का निवेश साबित हो रहे हैं.

खेती भी एक निवेश की तरह
अंजलेश का मानना है कि खेती भी एक निवेश की तरह है, जिसमें धैर्य और निरंतरता सबसे जरूरी है. वह कहते हैं कि किसान को प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चलना चाहिए. खेत की मेड़ों पर नीम, आम और जामुन जैसे पेड़ लगाने से न सिर्फ पर्यावरण संतुलन बना रहता है बल्कि अतिरिक्त आमदनी भी होती है. भविष्य को लेकर अंजलेश की एक और चाहत है. वह चाहते हैं कि खंडवा जिले की पहचान रही नेपा मिल दोबारा शुरू हो, जिससे किसानों, व्यापारियों और सरकार सभी को फायदा मिले और जिले का नाम फिर से रोशन हो.

बंजर जमीन भी उगल सकती है सोना
अंजलेश के माता-पिता का यह संघर्ष इस बात का सबूत है कि अगर मेहनत और सकारात्मक सोच हो, तो बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है. यह कहानी हर उस किसान और युवा के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालातों में भी आगे बढ़ने का हौसला रखते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

homeagriculture

बंजर जमीन उगलने लगी सोना! शिक्षक दंपति ने कर दिया हरा-भरा, हौसला देगी ये कहानी



Source link