नई दिल्ली: क्रिकेट जगत का हर दिग्गज सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को एक बेहतरीन कप्तान मानता है. गांगुली को टीम इंडिया की कप्तानी उस समय मिली थी जब भारतीय क्रिकेट पर फिक्सिंग के काले धब्बे लग चुके थे. इस सबके बावजूद गांगुली ने कभी परिस्थितियों से हार नहीं मानी और युवा खिलाड़ियों की मदद से भारतीय क्रिकेट को एक बार फिर पटरी पर ले आए.
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अपनी कप्तानी के दौरान गांगुली ने एमएस धोनी (MS Dhoni), युवराज सिंह (Yuvraj Singh) और मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) जैसे कई यंग खिलाड़ियों को खूब सपोर्ट किया, जिसकी वजह से टीम इंडिया को अपनी पुरानी पहचान वापस मिल गयी. वास्तव में गांगुली की कप्तानी ने भारत के लिए अमृत का काम किया क्योंकि उनके कैप्टन बनने से पहले मैच फिक्सिंग की वजह से भारतीय टीम पूरी तरह से बिखर चुकी थी. ऐसे में टीम इंडिया को गांगुली का साथ मिला और उन्होनें भारतीय क्रिकेट का इतिहास एक बार फिर से पूरी तरह से बदल दिया.
गांगुली का युवा खिलाड़ियों को सपोर्ट करना एक मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि इसी वजह से टीम इंडिया साल 2002 में नेटवेस्ट सीरीज जीतने और 2003 के वर्ल्ड कप में फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रही. गांगुली ने एक ऐप के साथ बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया कि वो क्रिकेटर्स के टेलेंट को पहचान और परखकर ही इस बात का निर्णय करते थे कि किस खिलाड़ी को क्या जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.
गांगुली ने यह भी बताया कि उन्होनें कभी किसी खिलाड़ी के नेचुरल गेम को बदलने की कोशिश नहीं की और इसी वजह से उनकी कप्तानी में कई बड़े खिलाड़ियों का जन्म हुआ, फिर चाहें वो युवराज सिंह हों या एमएस धोनी. गांगुली ने आगे कहा कि युवराज सिंह जैसा खिलाड़ी कभी राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) नहीं बन सकता, वहीं दूसरी तरफ राहुल द्रविड़ कभी युवराज सिंह नहीं बन सकते क्योंकि दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग है. जहां युवराज एक आक्रामक क्रिकेटर थे तो वहीं द्रविड़ शांत स्वभाव के थे.
गांगुली ने कहा, ‘एक कप्तान के तौर पर आप ऐसी आशा कतई नहीं कर सकते हैं कि युवराज सिंह जैसा खिलाड़ी राहुल द्रविड़ जैसा बर्ताव करे. युवराज सिंह एक आक्रामक खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते थे तो वहीं द्रविड़ बेहद शांत किस्म के खिलाड़ी थे. किसी भी बड़े लीडर की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है उनकी अनुकूलनशीलता यानी वो किसी भी माहौल में खुद को एडजस्ट कर ले.
एक लीडर को अपने टीम के खिलाड़ियों की प्रतिभा का सही इस्तेमाल करना आना चाहिए. आप युवराज सिंह को राहुल द्रविड़ नहीं बना सकते और राहुल द्रविड़ को युवराज सिंह नहीं बना सकते. एक बेस्ट लीडर हमेशा ही अपनी गलतियों से सीखता है और असफलता उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती. असफल होने पर हताश नहीं होना चाहिए और असफलता से मिली सीख ही आपको सफल बनाएगी.’