सतना की ‘ड्रोन दीदी’ खालिदा बेगम, घर के कबाड़ से बदल रहीं बच्चों का भविष्य

सतना की ‘ड्रोन दीदी’ खालिदा बेगम, घर के कबाड़ से बदल रहीं बच्चों का भविष्य


सतना. बचपन में जिस ट्रिग्नोमेट्री को पढ़ते वक्त अक्सर बच्चे सोचते हैं कि इसका असल जिंदगी में क्या काम होगा, ऐसे ही अटपटे सवाल आज मध्य प्रदेश के सतना की खालिदा बेगम के लिए ड्रोन, रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नींव बन चुके हैं. कभी क्लास में ऐसे सवाल पूछती थीं कि मास्टर साहब भी सोच में पड़ जाते थे और आज वही जिज्ञासा उन्हें ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पहचान दिला रही है. सतना की इस रोबोटिक्स इंजीनियर ने अब तक 500 से अधिक बच्चों को एआई और आधुनिक टेक्नोलॉजी की कोचिंग दी है और कम लागत में नवाचार की नई मिसाल पेश की है. लोकल 18 से बातचीत में खालिदा बेगम बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही टेक्नोलॉजी में गहरी रुचि थी. घर में पड़े कबाड़ से ही वह वॉटर लेवल इंडिकेटर, मैग्नेट और लाइट से जुड़े छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बना लिया करती थीं. हालांकि स्कूल और कॉलेज के दिनों में उन्हें दिक्कत तब आती थी, जब उनके टेक्निकल सवालों का जवाब खुद टीचर्स भी ठीक से नहीं दे पाते थे.

खालिदा ने विट्स, सतना से बीई की डिग्री हासिल की. कॉलेज में कंप्यूटर साइंस ब्रांच होने के बावजूद पढ़ाई ज्यादा थ्योरी तक सीमित थी जबकि उनका मन प्रैक्टिकल काम में लगता था. इसी वजह से उन्होंने इलाहाबाद में 6 महीने का एम्बेडेड सिस्टम और रोबोटिक्स कोर्स किया, जहां उन्होंने तकनीक की बारीकियां सीखीं. इसके बाद प्रयागराज और फिर बेंगलुरु में नौकरी की. साल 2015 से 2019 तक उनका यह प्रोफेशनल सफर चला लेकिन कोविड के बाद परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी.

लॉकडाउन के बाद बच्चों के लिए मिशन
नौकरी छूटने के बाद खालिदा ने हार मानने के बजाय अपने जुनून को नई दिशा दी. लॉकडाउन के बाद उन्होंने बच्चों को एआई, रोबोटिक्स और आधुनिक टेक्नोलॉजी सिखाने का फैसला किया. कम लागत में बच्चे कैसे आधुनिक मॉडल बना सकते हैं, यह समझाने के लिए उन्होंने कई फ्री कैंप आयोजित किए. साल 2020 में उनकी शादी हुई और 2023 में बेटी का जन्म हुआ लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा.

वेस्ट मटेरियल से इनोवेशन
खालिदा अब तक 50 से 100 के बीच मॉडल तैयार कर चुकी हैं. इनमें कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो घर में पड़े अनयूज्ड सामान से बनाए गए हैं, जैसे- वेस्ट पाइप से तैयार की गई ब्लाइंड स्टिक, जो आईआर सेंसर और बजर की मदद से सामने आने वाली रुकावट का संकेत देती है. इसी तरह उन्होंने खेती के लिए एक लो कॉस्ट ड्रोन भी बनाया है, जो पेस्टिसाइड छिड़कने में उपयोगी है. जहां बड़ी कंपनियां ऐसे प्रोजेक्ट 10 हजार रुपये में बनाती हैं, वहीं खालिदा उसी मॉडल को करीब एक हजार रुपये में तैयार कर देती हैं.

रोबोटिक्स का हब बना संस्थान
लाइन फॉलोअर रोबोट, सोलर कार, स्मार्ट डस्टबिन, होम ऑटोमेशन, सेल्फ पीसीबी डिजाइनिंग और कई सेंसर आधारित प्रोजेक्ट्स उनके काम का हिस्सा हैं. 2016 से वह बच्चों को सिखा रही हैं और अब तक 500 से ज्यादा बच्चों को फ्री सेमिनार के जरिए ट्रेनिंग दे चुकी हैं. आज उनका ईजीट्रोनिक नामक इंस्टीट्यूट छोटे बच्चों के लिए रोबोटिक्स का एक मजबूत हब बन चुका है, जहां से भविष्य के इनोवेटर्स निकल रहे हैं.



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