The monsoon has dented, water is not reaching the fields from the footy canal, paddy crop in 5 thousand bigha dry | मानसून ने दगा दे गया, फूटी नहर से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा, 5 हजार बीघा में धान की फसल सूखी

The monsoon has dented, water is not reaching the fields from the footy canal, paddy crop in 5 thousand bigha dry | मानसून ने दगा दे गया, फूटी नहर से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा, 5 हजार बीघा में धान की फसल सूखी


शिवपुरी16 घंटे पहले

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सूखे धान के खेत में खड़ा किसान।

  • जल संसाधन विभाग ने समय रहते नहर की मरम्मत करा दी होती तो नहीं सूखती फसल, समोहा डैम से निकली नहर से 25% किसानों को ही पानी मिल पाता है, आगे के 75% किसान के पास नहीं पहुंच रहा पानी

मानसून के दगा दे जाने से किसानों को इस बार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। करैरा क्षेत्र के गांवों में पानी नहीं लगने से धान की फसल खेतों में ही सूख गई है। समोहा डैम से नहर निकली है, लेकिन वह जगह जगह से फूटी हुई है। किसान अपनी धान की फसल को सूखने से नहीं बचा पाए। यह सीधे तौर पर जल संसाधन विभाग की लापरवाही है। गर्मियों में नहर की मरम्मत कराने का प्रावधान है लेकिन बरसात से पहले नहर की मरम्मत नहीं कराई। नहर जगह जगह से फूटने की वजह से आगे तक किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया। क्षेत्र में 25 से अधिक गांवों में किसानों की 5 हजार बीघा में धान की फसल सूखने से लाखों का नुकसान हो गया है। समोहा डैम से निकली नहर शुरुआत से ही जगह जगह से फूटी है। शुरू के गांवों में किसानों को पानी मिल रहा है लेकिन सड़ गांव से आगे वाले गांवों में नहर का पानी पहुंच नहीं पहुंच पा रहा है। बरसात का दौर थमने से किसानों के खेत पूरी तरह से सूख चुके हैं। इधर नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने से धान की फसल पूरी तरह सूख चुकी है। फसल सूखने से बचाने के लिए किसानों ने हरसंभव प्रयास किए लेकिन सिंचाई के साधन नहीं होने से हताश होकर रह गए। सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे किसानों को हुआ है जिनके पास सिंचाई के संसाधन नहीं है। खास बात यह है कि किसानों को लाखों का नुकसान हो गया है, लेकिन जल संसाधन विभाग के लापरवाह अफसरों पर इसका कोई असर नहीं है।

वे गांव जहां समोहा डैम से निकली नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंचा
टोटा पमार, धौंधारी, लेदा, चंदौरा, सडा, भासडा, टका, सता, खुदतररा, जोना हार, बड़ौनी, घिलौंदा, सोनागिर सहित अन्य 12 से ज्यादा गांव हैं जहां तक नहर का पानी नहीं पहुंचा है। सड़ गांव के किसान विनोद शर्मा का कहना है कि नहर निर्माण के बाद ठीक से कभी मरम्मत नहीं कराई। हर पांच से दस दिन में नहर फूट जाती है। इस कारण सड गांव से आगे पानी नहीं पहुंच पा रहा।
8 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
प्रति बीघा किसान 10 से 15 क्विंटल प्रति बीघा धान का उत्पादन लेते हैं। मंडी में भाव 15 से 2 हजार क्विंटल रहता है। इस लिहाज से किसानों की 5 हजार बीघा में धान फसल सूख जाने से 8 करोड़ से ज्यादा का नुकसान आंका जा रहा है। अब देखना है कि नुकसान की भरपाई शासन-प्रशासन किस रूप में करता है।

लाखों का नुकसान हो गया, भरपाई कौन करेगा
शुरुआत के गांवों में कुछ दबंगों ने नहर फोड़ दी जिससे हमारे खेतों तक पानी नहीं आ पाया। इस कारण हमारी फसल सूख चुकी है। लाखों का नुकसान हो गया है, इसकी भरपाई कौन करेगा?
छिंगा जाटव, किसान ग्राम सुनारी

नहर का पानी टेल पोर्सन तक पहुंचता है
किसान धान की सिंचाई करने के कोई पैसे जमा नहीं करते हैं, इसके बाद भी हमें उन्हें नि:शुल्क पानी उपलब्ध कराते हैं। नहर का पानी टेल पोर्सन तक पहुंचता है। रही बात नहर फोड़ने की तो उसे हम दिखवाएं लेते हैं।
बीडी रतमेले, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग



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